कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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( २८० ) बीजक कबीरदास ।
ठगि ठगि मूल सबनको लीन्हा। राम ठगौरी विरलै चीन्हा ४
कह कबीर ठगसो मन माना। गई ठगौरी ठग पहिचाना॥५॥
हरिठगजगतठगौरीलाई । हरिवियोगकसजियहु रेभाई॥१॥
हरिठग कहे हरिरूप द्रव्यके चोरावरनहारे गुरुवालोगते जगत् में ठगौरी
लगाइकै कहे उपदेश करिकै जीवको ठगि लेइहैं और और में लगाइकै सो
हेजीवो ! हरिके वियोगते तुम कैसे जिऔहौ ॥ १ ॥
कोकाकोपुरुषकौनकाकीनारी। अकथकथायमजालपसारी ॥
कोकाकोपुत्रकौनकाकोबापा। कोरेमरै कोसहैं संतापा॥२॥
यहसंसारमें जबसांचे साहबको भूल्यो तबको काको पुरुषहैको किसकी नारी हे
अकथकथा कहे कहिवेलायक नहीं है काहेते कि जिनकी उपासना करै हैं आपन
स्वामीमानैहैं तिनके स्वामी कबहूंहोयहै वोई याकी नारीहोयहै दासहोइहै