कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंशब्द । ( २७७ )
सायुज्य ४ सालोक्य ५ साष्टर्च तिनते जीवको लोभावै है कहे संब यह जाने है
कि इनहींकी देई दैजाइहै । जो जौनमुक्तिकी चाहकरिकै उनके समीप जाइहै ।
ताको श्रीरामनामके उपदेश करिकै तौन भाव बताइकै मुक्ति देइहैं । औ
आर मौनही रहै है कि, साहबके गुणगाइकै छके रहै हैं ॥ २ ॥
मान सरोवर तटके वासी।राम चरण चित अंत उदासी॥३॥
हंस जेहैं ते मानसरोवरके तटकेवासी हैं अरु वे साधुकैसे हैं कि मनरूपी जो
सरोवरहै ताके तटके वासीहैं कहे मनते भिन्न ह्वै रहैहै जामें हंसकी दशा है साह-
बकी दीन ऐसोजो चित्मात्रआपनो स्वरूपहै ताको परमपुरुष श्रीरामचन्द्रहैं
तिनहींके चरणनमें लगाइ राखैहैं अरुअंत उदासी कहे जो वह धोखा ब्रह्ममें अहं
ब्रह्मास्मि मानिकै आत्माको अंत ह्वै जाइहै आपै ब्रह्म मानिलेइहै वहजो है आत्मा
के अंत ह्वैबेको मन धोखा तेहित