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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

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पृष्ठ 328

( २७८ ) बीजक कबीरदास ।
अथ पैंतीसवां शब्द ॥ ३५ ॥
हरि मोरपीवमैंरामकीबहुरिया।राममोरबड़ामैंतनकीलहुरिया १
हरिमोररहँटामैरतनपिउरिया।हरिकोनामलैकातलबहुरिया २
छःमासतागवर्षदिनकुकुरी।लोगबोलेभलकातलबपुरी॥३॥
कहै कबीर सूत भल काता।रहँटा न होय मुक्तिको दाता॥४॥
हरि मोरपीवमैंरामकीबहुरिया।राममोरबड़ामैंतनकीलहुरिया १
मोर पीव हरि है । पीव कहे वे मोको प्यारहैं मैं उनकोऊ प्यार हैं ।
अरुमैं परमपुरुषपर श्रीरामचन्द्र की बहुरिया कहे नारी हौं । यहां नारी कह्यो
सो यह जीव साहबकी चितंशक्ति है तामें प्रमाण कबीरजीके आदि टकसार
ग्रन्थ को ॥ “आतम शक्ति सुबश है नारी । अमर पुरुष जेहि रची धमारी
॥ १ ॥ दूसरो प्रमाण सायर बीजकको ॥ “ दुलहिनि गाऊ मंगलचार ।
हमारे घर आये राम भतार ॥ तनरति करि मैं मनरति करिहौं पांचो तत्व
बराती । राम देव मोरे ब्याहन ऐहें मैं यौवन मद माती ॥ सरिर सरोवर
बेदी करिहौं ब्रह्मा वेद उचारा।राम देव संग भांवरि लेहौं धन २ भाग हमारा ॥
सुर तेंतीसौ कौतुक आये मुनिवर सहस अठाशी । कह कबीर हम ब्याह
चले हैं पुरुष एक अबिनाशी ॥ २ ॥ अरु श्रीरघुनाथजी मोरबड़ेहैं अरु मैं
तनकी लंहुरियाहौं, कहे उनके शरीर सर्वत्र व्यापक बिभुहैं औ मैं अणुहौं
तामें प्रमाण ॥ अणुमात्रोप्ययंजीवःस्वदेहंव्याप्यतिष्ठति । इतिस्मृतिः ॥ १ ॥
हरिमोररहँटामैरतनपिउरिया।हरिकोनामलैकातलबहुरिया
अरु हरिजै परमपुरुष श्रीरामचन्द्र हैं ते मोर रहँटा कहे चित् अचित्तरूपतें
जगतबोई हैं । अरुमैं रतनपिउरियाहौं यह जगत् जीवंही के वास्ते बन्योहै॥
“जीव सूत ह्वैकै लपटि रहै हैं । मैं रतनकी पिउरियाहौं तामे मैं नहीं लपटौहौं।
हरिजे श्रीरामचन्द्रहैं तिनको नाम लैके बहुरिया कहे उलटिकै मैं कात्यो अर्थात्
जगत्को जगद्रूप करिकैनहीं देख्यो जगत्को चित् अचितरूप करिकै देख्यो है
रामनाममें बहुरिकै साहब मुखअर्थ देख्यो जगत् मुखअर्थ नहीं ग्रहणकियो ॥२॥