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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

पृष्ठ 324, कुल 766 में से

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पृष्ठ 324

( २७४ ) बीजक कबीरदास ।
रूप जो वह धोखाब्रह्म है ताको रच्यो तामें मिलिकै तिरगुण जे सत रज तम
हैं तिनको तिहारे फांसिबेको प्रकट कियो । सो तीनों गुणाभिमानी जे तीनों
देवता हैं अरु पाखंडरूप जो धोखा ब्रह्म है तामें सब भूलिगये । घरको
खसम जब स्त्रीको बधिक कहे दुःख देन लाग्यो मारन लाग्यो तब स्त्री कहा
करै । तैसे जो राजा प्रजाको बधिक कहे मारन लाग्यो दुःख देन लाग्यो तब
बिचारे प्रजा कहा करें । सो यह मनतो सबको मालिक ह्वै रह्योहै सो यही
ने सबको दुःख देन लाग्यो तौ जीव कहाकरै ॥ २ ॥
भक्ति न जानै भक्त कहावै तजि अमृत बिष कैलिय सारा।
आगे बड़े ऐसही भूले तिनहुं न मानल कहा हमारा ॥ ३ ॥
भक्तिको तो जानै नहीं हैं भक्त कहावै हैं । अमृत जो है परमपर पुरुष
श्रीरामचन्द्रकी भक्ति ताको छोड़िकै विष जो है और और की भक्ति ताको
सारमानि लियोहै सो आगे जे बड़ेबड़े ह्वैगये हैं तेऊ ऐसेही भूलिगये हमारो
कह्यो नहीं मान्यो साहबकी भक्ति छोड़िकै और की भक्ति करिकै संसारही
में परतभये ॥ ३ ॥
कहल हमारा गांठी बँधो निशि वासरहि होहु हुशियारा ।
ये कलिके गुरु बड़ परपंची डारि ठगौरी सब जग मारा ४
सो हमारो कहो गांठीबांधो । जो अबहूं हमारो कह्यो न मानौगे साहबकी
भक्ति न करोगे तौ संसारही में परौगे । कलियुगके जे गुरुवा हैं ते बड़े पर-
पंची हैं सब जगका ठगौरी कहे ठगिकै परमपुरुष पर जे श्रीरामचन्द्रहैं तिनकी
भक्तिको छोड़ाइकौ और और मतनमें डारिदेइहैं । सो निशिबासर हुशियार रहो
अर्थात् निशिबासर रामनामको स्मरण करतरहो साहबको जानतरहो गुरुवा
लोगनको कहा न मानो ॥ ४ ॥
वेद किताव दोय फंद पसारा ते फंदे पर आप विचारा ।
कह कबीर ते हंस न विछुरे जेहि मैं मिलो छोड़ावन हारा ५॥
वोई जे गुरुवालोगहैं तेये वेद किताबको फंदा पसारि कै नाना मत में गुरुआई
करतभये । सो वहींफंदमें आप परतभये औ औरहू को वहींफंदमें डारिकै नानाम-