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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 321

शब्द । ( २७१ )
श्रीकबीरजी कहैहैं कि हिंदूतो बोकरा मारिके मुसल्मान गायमारिकें नानाप्र-
कारके वाद विवाद करिके अथवा बादिकहे वृथाही दोऊ भूलिके जन्म गँवाइ
दियो परमपुरुष पर जे श्रीरामचन्द्र तिनको न पावत भये हिन्दू तुरुककें खुद-
खाविंद एकई है कोई विरले जानैहैं ते वहां पहुंचे तामें प्रमाण झूलना ॥
“छोड़ि नासूतमलकूत जबरूत लाहूत हाहूत बाजी । और साहूतराहूत इहांडा-
रिदेकूद आहूत जाहूत जाजी ॥ जायजाहूतमें खुदखाविंद जहँ वही मक़ान-
साकेत साजी । कहै कबीरह्वां भिस्त दोजख थके वेदकीताबकाहूतकाजी”॥५॥
इति तीसवां शब्दसमाप्त ।
अथ इकतीसवां शब्द ॥३१॥
हंसा संशय छुरी कुहिया । गैया पियै बछरुवै दुहिया १
घरघर सावज खेलै अहेरा पारथ वोटा लेई ।
पानी माहिं तलफिग भूभुरि धूरि हिलोरा देई ॥ २ ॥
धरती वरसै वादल भीगै भीटभया पैराऊ ।
हंस उड़ाने ताल सुखाने चहले बीधा पाऊ ॥ ३ ॥
जौ लगि कर डोलै पगु चलई तौ लगि आश न कीजै ।
कह कबीर जेहि चलत न दीखै तासुवचन का लीजै॥४॥
हंसा संशय छुरी कुहिया । गैया पियै बछरुवै दुहिया १
घरघर सावज खेलै अहेरा पारथ वोटा लेई ।
पानी माहिं तलफिंगै भूभुरि धूरि हिलोरा देई ॥ २ ॥
कबीरजी कहै हैं कि हे हंसा! संशयरूप छूरिते मारिगयो तोको उलटों ज्ञान
है गयो । बछरुवा जो है तेरोस्वरूप औरं ज्ञानरूप जो है दूध ताको गैया जो
माया सो दुहिकै पीलियो ॥ १ ॥ सावज जो या मनहै सो घरघरमें कहे शरीर