कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २७० ) बीजक कबीरदास ।
कहत तो एकही को हैं ॥१॥ जैसे एक गहना को सुवर्ण ते गहना कहे गहिलेई
कहे सुवर्ण बिचारिलेइ तामें भाव दूजा नहीं है वह सुवर्ण है जैसे कोई चूड़ा कोई
बिजायत इत्यादिक नाम कहै हैं परन्तु है सुवर्णही तैसे कहिबे सुनिबेको दुइ करि
थाप्यो ह यक निमाज़ यक पूजा परन्तु है सब साहबकी बंदगीही परम परपुरुष
श्रीरामचन्द्रही को सेवै हैं ॥ २ ॥
वही महादेव वही महम्मद ब्रह्मा आदम कहिये ।
कोइ हिंदू कोइ तुरुक कहावै एक जिमीं पर रहिये ॥ ३ ॥
वोही परम परपुरुष श्रीरामचन्द्रको महादेव औ महम्मद औ ब्रह्मा औ
आदम सब कहिये कहे कहतभये कोई राम कहिकै कोई अल्लाह कहिकै
कुरानमें लिखै है कि सब नामनमें अल्लाहनाम ऊपर है औ यहां वेदपुराण में
लिखै है कि सबनामनमें रामनाम ऊपरहै तामें प्रमाण ॥ “ सर्वेषामपिमंत्राणांरा-
ममंत्रफलाधिकम् ” ॥ इति ॥ “ सहस्रनामतत्तुल्यंरामनमावरानने ” ॥ यातै
सबके मालिक परम पुरुष श्रीरामचन्द्रही जगदीशहैं दूसरो जगदीश नहीं है । उन
हींके अल्लाहनामको सब नामनते परे महम्मद कुरानमें लिख्योह औ उनहीं नाम
को महादेवने तंत्रमें लिख्योहं औ ब्रह्मा वेदमें कहतभये आदम किताबमें कहत-
भये अरु इहांतो एक जे परमपुरुष श्रीरामचन्द्रहैं तिनहीं के जिमींमें कहे जगतमें
रहत भये । नामके भेदते कोई हिन्दू कोई मुसलमान कहावै है ॥ ३ ॥
वेद किताब पढ़ें वे खुतुबा वे मोलना वे पांड़े ।
विगत विगतके नाम धरायो यक माटी के भाँड़े ॥ ४ ॥
जिनके पोथी जमा होयहैं ते कहावैं खुतुबा वे वेदपुराण जमा कैकै पढैहैं वे
किताब जमाकैकै पढै हैं वे पंडितकहावै हैं वे मोलना कहावै हैं वेद पढ़िकै पंडित
किताब पढ़िकै मोलना कहावैं विगत विगत कहैं जुदा जुदा नाम धराय लेते
भये हैं एकई माटीकेभांड़े कहै हैं सब पांचभौतिकही हैं ॥ ४ ॥
कह कबीर वे दूनौं भूले रामहिं किनहुं न पाया ।
वे खसिया वे गाय कटावैं बादै जन्म गँवाया ॥ ५ ॥