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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 319

शब्द । ( २६९ )
ब्रह्मको लेश नहीं है सो हे कबीर ! कायाके बीर जीवो ! मायाब्रह्मके तुम परे
हौ तहांते उठिकै कहै मायाब्रह्मके विघ्नन्ते निकसिकै साहबको मिलौ तबहीं
तिहारों जनन मरण छूटैगो ॥ ४ ॥
इतिउन्तसीवां शब्द समाप्त ।
अथ तीसवां शब्द ॥ ३० ॥
भाई रे!दुइ जगदीश कहांते आये कहु कौने भरमाया ।
अल्लाः राम करीम केशव हरि हजरत नाम धराया ॥ १ ॥
गहना एक कनक ते गहना तामें भाव न दूजा ।
कहन सुननको दुइ करि थापे यक निमाज यक पूजा ॥२॥
वही महादेव वही महम्मद ब्रह्मा आदम कहिये ।
कोइ हिंदू कोइ तुरुक कहावै एक ज़िमीं पर रहिये ॥ ३ ॥
वद किताब पढ़ें वे खुतवा वे मोलना वे पांडे ।
विगत विगतकै नाम घरायो यक माटी के भांड़े ॥ ४ ॥
कह कबीर वे दूनौं भूले रामहिं किनहुं न पाया ।
वे खसिया वे गाय कटावैं वादै जन्म गँवाया ॥ ५ ॥
अब यहां यह वर्णन करै हैं कि दूसरो जगदीश नहीं है परमपरपुरुष जे
श्रीरामचन्द्रहैं तेई जगदीशहैं ॥
भाई रे ! दुइ जगदीश कहांते आये कहु कौने भरमाया ।
अल्लाः राम करीम केशव हरि हजरत नाम धराया ॥ १ ॥
गहना एक कनकते गहना तामें भाव न दूजा ।
कहन सुननको दुइकरि थापे यकनेवाज यकपूजा ॥ २ ॥
श्रीकबीरजी कहै हैं कि, हे भाइउ ! दुइजगदीश कहांते आये तोको कौनै
भरमायो है । अल्ला राम करीम केशव हरि हजरत ये तौ सब नामभेद हैं