कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
पृष्ठ 310, कुल 766 में से
संदर्भ में पढ़ें( २६० ) बीजक कबीरदास ।
आलम दुनी सकल फिरि आये कलि जीवहि नहिं आना ।
ताही करिकै जगत उठावै मनमें मन न समाना ॥ ३ ॥
कहै कबीर योगी औ जंगम फीकी उनकी आसा ।
रामै राम रटै ज्यों चातक निश्चय भगति निवासा ॥ ४ ॥
कोई बिरला दोस्त हमारा भाईरे बहुत का कहिये ।
गाठन भजन सवारै सोइ ज्यों राम रखै त्यों रहिये ॥ १ ॥
कबीरजी कहै हैं कि, हे भाइउ जीवौ ! और और बहुत मतवारे तौ बहुत
जीव हैं तिनको कहा कहिये । रामोपासक हमारो दोस्त जैसे हम गाढ़ भजन
करिकै रामचन्द्र को देख रहे हैं ऐसे वह गाढ़ भजन करिकै रामचन्द्र
को देख रहे । औ जैसे हम को राम राखै है तैसही रहे हैं ऐसे वहू रहे हैं ।
क्षणभरि न भूलै ऐसा कोई बिरला है ॥ १ ॥
आसन पवन योग श्रुति संयम ज्योतिष पढ़ि वैलाना ।
छौदर्शन पाखंड छानवे येकल काहु न जाना ॥ २ ॥
अब बहुत मतवारे जे बहुतहैं तिनको कहै हैं कोई आसन दृढ़ करैहै कोई
पवन साधैहै कोई योग करैहै कोई वेद पढ़ैहै । कोई संयम करैहै कोई व्रत
करैहै कोई ज्योतिष पढ़ै है सो ये सब बैकलाइ गये । जो बैकल होइहै सो
झूठको साँच जानैहै औ साँच को झूठ मानैहं । सो छःदर्शन छानबे पाखण्ड-
वारे जे ये सबहैं एकल कहे एक स्वामी सबके परमपुरुष श्रीरामचन्द्र हैं
तिनको न जान्यो अथवा एकल कहे जौने करते मैं उपासना करौहौं सो कोई
नहीं जानै है ॥ २ ॥
आलम दुनी सकल फिरि आये कलि जीवहि नहिं आना ।
ताही करिकै जगत उठावै मनमें मन न समाना ॥ ३ ॥
आलम कहे दुनियां संसार सो सब जीव दुनियामें फिरि आये गुरुवां लोगनके
यहांपर या कल जौनेकरते मैं उपासना श्रीरामचन्द्रकी करौ हौं सो आपने जियमें
न आनत भये जातेसंसार छूटिजाय साहब मिलैं जे नानामत आगेकहिआये ताहीं