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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 306

( २५६ ) बीजक कबीरदास ।
पौविनुपत्रकरहविनुतुम्बा बिनुजिह्वागुणगावै ।
गावनहारकेरूप न रेखा सतगुरुहोइलखावै ॥ ३ ॥
अब श्रीकबीरजी जीवात्मा को वृक्षरूप हैकै बर्णन करैं हैं पौबिनु कहे आत्माको
जगत्को अंकुर नहीं है मनके संयोगते दुःख सुखरूप पत्रदुइ लागबेई कियो औ
करहूजो कर्म है सो नहीं रह्यो आत्मामें जगतरूप तुम्बा लागबेई कियो । यह
जीवात्माकी दशाकाहेतेभई कि, बिनु जिह्वा जांहै निराकार ब्रह्म ताके जे गुणहैं
देश काल बस्तु परिच्छेद ते शून्यत्व सो आपने में लगावन लग्यो । ये गुण
मोहीं में हैं मेरोस्वरूप यही है सो जो या आपनेको ब्रह्ममान्यो तौ आत्माके
ब्रह्मकेरूपको रेखनहीं है काहेते याको देश बनो है समष्टि जीवलोक प्रकाशमें
रहैहैं, औ कालबन्यो है जैनेकालमें समष्टिते व्यष्टि होयहै, औ या देश काल
बस्तु परिच्छेदते संहितहै काहेते अणुहै भगवद्दासहै तामें प्रमाण॥ "बालाग्रशत-
भागस्यशतधाकल्पितस्यच॥ भागोजीवःसविज्ञेयः सचानंत्यायकल्पते" इतिश्रुतिः
अंशोनानाव्यपदेशांत्ते ॥ ३ ॥
पक्षी खोज मीनको मारग कहे कबीर दोउ भारी ।
अपरम पार पार पुरुषोत्तम मूरति की बलिहारी ॥४॥
ताते मीनकी नाईं संसारते उलटी गति चलिकै पक्षी जो हंस स्वरूप आपनो
ताको खोज कबीरजी कहैं हैं ये दोऊ भारी हैं संसारते उलटी गति होइबो:यह
भारी है, आपनो हंसरूप पाइबो यहू भारी है । सोसंसारते उलटी गति करि
हंसरूप पाइकै परमपर जो आत्मारूप पार्षदरूप ताहूते उत्तम जे परमपुरुष
पर श्रीरामचन्द्र तिनकी बलिहारी जाय । भाव यह है तब तेरो जनन मरण
छूटैगो ॥ ४ ॥
इति चौबीसवां शब्द समाप्त ।