कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २६४ ) बीजक कबीरदास ।
तब शिष्यनके पढ़ाइबेको बरदाको कह्यो तबबरदा शिष्यनको पढ़ायो है । औ
जे साहबकी सामर्थ्यते ऐसी सामर्थ्य उनके दासनेके द्वैगई कि, वोई अनहद
वाणीको बोले हैं जाकी हद नहीं है ॥ ४ ॥
बाँधि अकाश पताल पठावै शेषस्वर्ग परराजै ।
कहै कबीर रामहै राजा जोकुछ करै सो छाजै ॥ ५ ॥
औ आकाश जो है आकाशवत् ब्रह्म तौनेको जोमानै है कि वह ब्रह्म
मैंहीं हौं ताको साहब अपनो ज्ञान कराइकै धोखा ज्ञानको बाँधि कै पतालमें
पठै दैहै । अर्थात् तेहि जीवको मूलज्ञान निर्मूलई करि देयहै । जैसे लोकमें
या बात कहै हैं कि, या खनिकै गाड़देव ऐसे गाड़दियो फिरि वा अज्ञानको अंकुर
नहीं होयहै । औ शेष कहे भगवत् शेषजो है जीव सो जे साहबकी सामर्थ्यते
स्वर्गादिकन के परे जोहै साहबको लोक तहाँ राजै हैं । "स्वर्गपदको अर्थ जो
दुःखते भिन्न स्थान होयहै सो कहावै स्वर्ग" । औ जो लोक मकाश ब्रह्म ताहूते परे
जो साहब तहाँराजैहै दुःखरहितस्थानको स्वर्ग कहै हैं तामें प्रमाण। "यन्नदुःखेनसंभिन्नं
नचग्रस्तमनंतरम् । अभिलाषोपनीतंच तत्पदंस्वःपदास्पदम्" इति॥ सो कबीरजी
कहै हैं कि यह अघटित घटना सामर्थ्य परम परपुरुष श्रीरामचन्द्रही हैं वे रा-
जा हैं वे जोकुछकरैं सो सब छाजैहै चाहे रंकको राजा करैं चाहे राजाको रंक करैं
चाहे लौंगमें फल लगावैं चाहे चंदनमें फूल फुलाय देयँ चाहे मछरीको बनमें
रमावै चाहे सिंहको समुद्र में रमावैं चाहे रेंडारूखको चंदनकरैं. चाहै अंधाको
तीनउ लोक देखाय देयँ चाहे पंगुको सुमेरु नँघायदेयँ चाहे गूंगाको ज्ञान
कहवायदेइँ.चाहे आकाशको बाँधिके पातालैपठावैं चाहे पातालवासी जे शेष तिनको
स्वर्गपरराखैं, या सामर्थ्य उनमेंहै श्रीरामचंद्र तौराजा हैं तामेंप्रमाण ॥ "राजाधि-
राजस्सर्वेषां रामएवनसंशयः ॥"औ उनहींकी भयते सूर्य चन्द्रमा अवसरमेंउये हैं
औमृत्यु जबसमय आवैहै तबखायहै तामें प्रमाण॥ यद्भयाद्वाति वातोयं सूर्यस्त-
पतियद्भयात् ॥ वर्षतींद्रो दहत्यग्निर्मृत्युश्चरति पंचमः ॥ इतिश्रीमद्भागवते ॥५॥
इति तेईसवां शब्द समाप्त ॥