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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 299

शब्द । ( २४९ )
दुखित सुखितसबकुटुंब जेंवइवे।मरणबेर यकसरदुखपइवे४
कह कबीर यहकलिहै खोटी।जो रहकरखा निकसललोटी५
राम न रमसि कौन दँड लागा । मरि जैहै का करिहै अभागा
सबको दंड छोड़ाय देनवारे जे सबते परे परमपुरुष श्रीरामचंद्र हैं तिनमें
जौतैंनहीं रमैहै सो तोको गुरुवा लोगनको कौन दंड लगौहै यहतो सबयहींके
साथी हैं साहबके भुलायदेनवारे हैं जेउपदेश करनवारेगुरुवनके कहे माया ब्रह्म
आत्माको ज्ञानरूपी दंडचवावमें जोते परे हैं सो हे अभागा! जबतैंमरिहै तबवे
गुरुवा तोको न बचासकेंगे तब क्याकरोगे ॥ १ ॥
कोई तीरथ कोई मुंडितकेशा। पाखंड भर्म मंत्र उपदेशा२
तीर्थनमें जाइकै कोई चहौहै कि, बिना ज्ञानही मुक्तिहै जाइहै औकोई मूड़-
मुड़ायकै वेषबनाइकै संन्यासीहैकै औ अपने आत्माहीको मालिक मानिकै
चाहौहौ कि मुक्तहैजायँ । औकोई नास्तिकादिकनके जेनानापाखंड मतहैं तिनमें
लागिके जानौकि मुक्त ह्वैगये औ कोई भ्रमजो धोखाब्रह्महै तामें लागिकै अपने-
कोब्रह्म मानिकै जानौहौ कि हममुक्तह्वैगये औकोई और और देवनके मंत्रउप-
देश पायकै जानौहौ किं हममुक्तह्वैगये ॥ २ ॥
विद्या वेद पढ़ि कर अहङ्कारा।अंतकाल मुखफांकै क्षारा॥३॥
अरुकोई वेदबाह्य जे नाना विद्या अपने अपने गुरुवनकी भाषा तिनको पढ़िकै
औ कोई वेद पढ़िकै वेदमैं शास्त्र औ चौंसठ कलादिक सब आइगये अहङ्कारकरोहो
कि हम मुक्तह्वैगये सोमुक्ति तों जिनको वेदतात्पर्य करिकै बतावैहै ऐसेजे परमपरपुरुष
श्रीरामचंद्रहैं तिनके बिनाजाने न होयगी । होयगो कहां ? कि जबअंतकाल तेरो
होइगो तब यहौ मुखमें क्षार फांकैगो औ पुनिजब पुण्यक्षीणहोइगो तब लोक
आवोगे तबहूं मरबै करोगे क्षारई फांकौगे ॥ ३ ॥
दुखितसुखितसबकुटुंबजेंवइवे । मरणबेरयकसरदुखपइवे४
दुःखसुखमें सबकुटुम्बनको जेंवावैहै तेमरणसमय कोईकाम नहीं आवैहैं तैं
अकेलही दुःखपावैहैं परन्तु सहायतेरी कोई नहीं करिसकैं हैं ॥ ४ ॥