कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंशब्द । (२४३)
है । औ वही गुनाहका बख्शनेवाला है औरे के छुड़ाये न छूटैगो । जब श्रीरा-
मचन्द्र जीवको छोड़ावेंगे तबहीं छूटैगो । औ खोदाके सौ नाम हैं निन्नानब
सगुणनाम हैं, औ मुक्तिको देनवारो निर्गुण अल्लाह नामही है वही खुद खाविं-
दका नाम है । तौने बात वेद शास्त्रनमें भी सिद्धान्त कियो है । कोई कोई जे
साहवके पहुंचे हैं ते बेग्रंथ जानै हैं सो लिख्यो है कि, और देवतनके नामतें
अधिक और सब नाम भगवान्के हैं औ भगवान्के सब नामते अधिक रामनाम
है । सो महादेवजी पार्वतीजी ते कह्यो है ॥ “सहस्रनामतत्तुल्यंरामनामं वरा-
नने । सप्तकोटिमहामंत्राश्चित्तविभ्रमकारकाः । एकएव परोमंत्रोरामइत्यक्षरद्व-
यम् । विष्णोरेकैकनामापि सर्ववेदाधिकंमतम् । तादृङ्नामसहस्त्रेणरामनामसमंस्मृ-
तम्” ॥ इतिपाद्मे॥ औ गोसाईंजीहू लिख्यो है। “रामसकल नामनते अधिका”॥
सो यही रामनाम तै अल्लाहनाम निकस्यो । “राम नामके
मकारको रकार भये आगेका पीछे आया तब अरभया सो अर राके पीछे आया
तब “अर राम भयो रलके अभेदसे अल्लाभयो” व्याकरण वर्णविकार वर्णकार
वर्णविपर्यय पृषोदरादि पाठसे सिद्ध शब्दको साधनके वास्ते प्रसिद्धहै । औ
जो सदाशिव संहितामें दशमुकाम लिखि आये हैं औ पहिले रेखतामें लिखि-
आये हैं सो कबीरजी पुनि खुद खाविंदको दूसरे रेखतामें वहीबात लिख्यो है
“जुलमत नासूत मलकूतमें फिरिस्ते नूर जल्लाल जबरूतमें जी । लाहूतमें नूर
जम्माल पहिंचानिये हक मकान हाहूतमें जी ॥ बका बाहूत साहूत मुर्शिद
वारहै जोरब्ब राहूतमें जी । कहत कबीर अबिगति आहूतमें खुद खाविन्द
जाहूत में जी ॥ १ ॥” सो वे जे परम परपुरुष श्रीरामचन्द्र हैं तिनके गुण
सबते न्यारे हैं औ उनको धाम सबते परेहै वाकोकोई अंतनहीं पायो सो तिनके
गुण हे जीवो ! तुम कैसे पावोगे ॥ ५ ॥
इति अठारहवां शब्द समाप्त ।
अथ उन्नीसवां शब्द ॥ १९ ॥
एतत राम जपो हो प्राणी तुम बूझो अकथ कहानी ।
जाको भाव होत हरि ऊपर जागत रैनि विहानी ॥ १ ॥