कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २४२ ) बीजक कबीरदास ।
तिनमें पांच मुकाम मुसलमाननके कहै हैं औ पांचमुकाम छोड़िदेइहैं तिनकों
उनहींमें गतार्थ मानिलेइहैं । मुसलमाननमें वोई पांच मुकामके दुइनामहैं “ नासू-
तको आलम अजसामकहे शरीरधारी । ” याते यहलोकके सब आइगये औ
मलकूत को “ आलम मिसाल फिरिस्तनकै दुनियां देवलोक ” औ जबरूतको
आलम अर्थात् कहे पृथ्वी अप तेज बायु तत्त्वरूपहै “ औ लाहूतको आलम
कूर्ब कहे नूर अर्थात् श्रीकृष्णको मुख्यप्रकाशजोहै ब्रह्म वहीको कही लोकप्रकाश
लिख्योहै ” औ “ हाहूतको मुकाम महम्मदकैकहे जहांभर महम्मद पहुंचे है ”
श्रीकृष्णके लोक अब इनके मंत्रऊ लिखे हैं॥ जिकर नासूत “लाईला हइलाहू”
जिकिर मलकूत “इल्लिल्लाहू” जिकिरजबरूत “अल्ला: अल्ला:” जिकिरलाहूत
अल्लाह जिकिरहाहूत “हूंहूं” ॥ सोइनको रातिदिन पांचहज़ारबार जपकैरै ।
जब पांचहज़ारहोय तबध्यानकरै औध्यानमें गड़ै औ आपको भूलै फिरिजहानकों
भूलै पुनि जिकिरि कहे मंत्रको भूलै तब क्रमते मजकूरको पहुंचै अर्थात् अल्हा-
हीजे श्रीकृष्णचंद्र हंसस्वरूप देइँ तामें स्थित ह्वैकै जिनको प्रकाश निराकार जो हैं
ऐसेजे श्रीकृष्णहैं तिनकेपास होत उनके बताये मन बचनके परे जे खुद खाविंद
सबके बादशाह जे श्रीरामचंद्र है तिनके पास जाताहै । सो यह मत महम्म-
दजे साहबके बंदे हैं तिनको साहब भेजा । तब जे साहबके पास पहुंचनवारे रहे
तिनको महम्मद भेद बताइदियो । सो बिरले कोई कोई यह भेद जानै हैं जे जानै हैं
ते साहबके पासपहुंचै हैं । अब याको क्रम बतावैं हैं जौनी भांति साहबके पास
पहुंचै तामें प्रमाण॥पीरानपीरसाहबके पासपहुंचे ऐसेजेहैं सलोकके मालिक पनाह
अता तिनको कबित्त ॥ “देह नासूत सुरै मलकूत औ जीव जबरूतकी रूह
बखानै । अरबीमें निराकार कहै जेहि लाहुतै मानिकै मंजिल ठानै॥आगे हाहूत
लाहूत है जाहूत खुद खाविंद जाहूतमें जानै । सोई श्री रामपनाह सब जग-
नाह पनाह अता यह गानै ॥ १ ॥दोहा॥तजै कर्मनासूतलहि, निरखै तब मलकूत ।
पुनि जबरूतै छोड़िकै, दृष्टि परै लाहूत ॥ २ ॥ इन चारोंतजि आगेही, पना-
हअता हाहूत। तहां न मरै न बीछुरै, जात न तहँ यमदूत ॥३॥ औ “जुलजला-
लअव्वल” एकराम मुसलमानोंके कहै हैं किताबनमें प्रसिद्धहै साहब बुजुर्गीका
साहब बख्शीश का अर्थात् वह सबते बुजुर्गी कहे बड़ा है उससे बड़ा कोई नहीं