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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 288

( २३८ ) बीजक कबीरदास ।
ते ब्रह्माते कह्यो कि, जगत् बनावो, तब बनावत भयो। नारायण जे रामावतार लेइ हैं
तामें प्रमाण " यदास्वपार्षदौजातौराक्षणप्रवरौप्रिये । तदानारायणः साक्षाद्रा-
मरूपेणजायते ॥ प्रतापीराघवसखा भ्रात्रावै सहरावणः । राघवेनतदासाक्षात्साके-
तादवतीर्यते " ॥ नारायण अंत न पायो ते नारायण रामचन्द्र क्षीरशायी
श्वेत द्वीप निवासी बहुतहैं जिनकेगुण को अंतकोई नहीं पावैहैं। अरु जिनके
गुण सबके गुणते न्यारे हैं ते श्रीरामचन्द्र एकई हैं। औ केतेकान्ह मुरलीधर
भये तिन भी अंत नहीं पायो काहेते कि उनके अनंत गुणहैं ॥ २ ॥
मत्स्य कच्छ वाराह स्वरूपी वामन नाम धराया ।
केते बौद्ध भये निकलङ्की तिनभी अंत न पाया ॥ ३ ॥
केतिक सिद्ध साधक संन्यासी जिन वन वास वसाया ।
केते मुनिजन गोरख कहिये तिनभी अंत न पाया ॥ ४ ॥
औ केतन्यो मत्स्य कच्छ बाराह वामन बौद्ध कलकीरूप भये तिनभी
अंतनहीं पायो सोई अवतार जो कहिआये तिनमें वामन नरसिंह आदिक अव-
तार आइगये तेऊ अंतनहीं पायो है॥ ३॥ औ केतन्यो सिद्ध साधक संन्यासी भये
जे वनमें वासकरतभये औ केतन्यो मुनि गोरख इंद्रिन के रखवार भये तेऊ-
ताको अंत नहीं पायो ॥ ४ ॥
जाकीगति ब्रह्मै नहिं पाई शिव सनकादिक हारे ।
ताके गुण नरकैसे पैहौ कहै कबीर पुकारे ॥ ५ ॥
औ जाकी गति ब्रह्मा शिव सनकादिक नहीं पायो काहेते कि, तिनके अनंत
गुण हैं सो हे नर! तुमकैसे पावोगे? जे गुरुवनके कहे कहौहौ कि महीं राम हौं
सो मिथ्या है बे रामके गुण न तुम्हारे गुरुवा पायो है न तुम पावोगे । व्यंग
यहहै कि, ते वे पाखंडी गुरुवनको संगछाँड़िकै रामोपासकनको संगकरौ तब
जैसी भजन क्रिया वे करैहैं सो करिके निर्गुण सगुणकेपरे साहबके लोकजाउ,
तब तिहारो जनन मरण छूटैगौ । ये गुरुवालोग जौनेमें सिद्धांतकरि राखे हैं ते
सब याहीकैतोहै निर्गुण सगुणमें है औ परमपुरुष पर साहबको लोक सबके
परहै तामें प्रमाण कबीरजीको रेखता झूलनाछंद पिंगलमेंकहै हैं ॥ " चला