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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 287

शब्द । ( २३९ )
मत्स्य कच्छ वाराह स्वरूपी बामन नाम धराया ।
केते बौद्ध भये निकलंकी तिनभी अंत न पाया ॥ ३ ॥
केतक सिद्ध साधक संन्यासी जिन बनवास बसाया ।
केते मुनि जन गोरख कहिये तिनभी अंत न पाया ॥ ४ ॥
जाकी गति ब्रह्म नहिं पाई शिवसनकादिक हारे ।
ताके गुण नर कैसेपैहौ कहै कबीर पुकारे ॥ ५ ॥
राम गुण न्यारो न्यारो न्यारो ।
अबुझा लोग कहांलौं बूझैं वूझनहार बिचारो ॥ १ ॥
परमपुरुष पर जे श्रीरामचन्द्र हैं तिनके गुण न्यारे न्यारे हैं । इहां तीन
बार जो कह्यो ताते या आयो कि साहबके गुण, मायाके गुणते जीवात्माके
गुणते ब्रह्मके गुण न्यारे हैं । कौनी रीतिसे न्यारे हैं कि, मायाके गुण नाशवान्
हैं बिचार किये मिथ्या हैं । औ साहबके गुण नित्यहैं साँचहैं, औ जीवात्माके
गुण अणु हैं । औ साहब क गुण विभुहैं औ ब्रह्मनिर्गुणत्वगुणब्रह्ममें है औ
साहब निर्गुण सगुणके परे है सो या प्रमाणपीछे लिखि आये हैं ॥ “ अपाणि-
पादोजवनो गृहीता” इत्यादि औ ब्रह्मसंबंधी अनुभवानंदजीवको होइ है औ साहब
अनुभवातीत है याते साहबक गुण सबते न्यारे हैं सो वा बात अबुझा लोग
कहांलौं बूझैं, कोई बूझनहार तो बिचारते जाउ ॥ १ ॥
केते रामचन्द्र तपसी सा जिन यह जग विटमाया ।
कत कान्ह भये मुरलीधर तिनभी अंत न पाया ॥ २ ॥
केतन्यो रामचन्द्र हैं कौन रामचन्द्र ज तपस्वी ब्रह्म हैं तिनसों जगत बिट-
माया कहे बनायोहै । अर्थात् जे नारायण रामावतार लेइहैं सो ब्रह्माते कैसे
जग बनवायो । सो कथा पुराणन में प्रसिद्धहै कि, कमलमें ब्रह्मा भये, तब
आकाशवाणी भई, “ तप तप ” तब तपस्या कियो, तब नारायण प्रकटभये,