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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 279

शब्द । ( २२९ )
बिनवो न कह्यो बिनवाइबो कह्यो सोबिना चैतन्य ब्रह्म औजीवके लपेटे याको
बनायो नहीं बनै है काहेते कि, यह जड़है अर्थात् ब्रह्म जीवको संयोग करिकै
बनवानको चली । ब्रह्मजीवके पाससों जोलाहा जो यह जीवहै सो घरको छो-
ड़ेदेयहै अर्थात् यहशुद्ध जीवात्मा आपनो जो घरहै साहबके लोकको प्रकाश
जहांशुद्ध रहैहै तौनै घरको छांड़िकै, माया के लपेटमें परिके, आपने बंधनको
आपने मन करिके संसाररूपी पटको बनावैहै ॥ १ ॥
गज नौ गज दश गज उनइसकी पुरिया एक तनाई ।
सात सूत नौ गाड़ बहत्तर पाट लागु अधिकाई ॥ २ ॥
प्रथम एकगजकी कल्पनारूप पुरिया तनावत भई प्रथम जीव बाणी प्रणव-
रूप एक गजकी पुरिया अनुमान ब्रह्म बनायो अर्थात् मन भयो । पुनि नौ
गजकी पुरिया तनावत भई सो नवौ व्याकरण बनावत भई । अर्थात् नवौ
व्याकरणमें शब्द ब्रह्मको वर्णन ह सो शब्द बनावत भई । पुनि दश गज की
पुरिया तनावत भई, सो चारवेद औ छः शास्त्र ई दशगजकी पुरिया तनावत-
भंयी सो अठारहों पुराण उनीसों महाभारत ये उनइसगजकी पुरिया बनावत
भयो ॥ २ ॥ पुनि सात सूत कहे सप्तावरण १ पृथिवी २ अपु ३ तेज ४
वायु ५ आकाश ६ अहंकार ७ महत्तत्त्व अथवा सात सूत १ जाग्रत् २
महाजाग्रत् ३ बीजजाग्रत् ४ स्वप्नजाग्रत् ५ स्वप्न ५ सुषुप्ति ६ औ७ महासुषुप्ति
ये सात अज्ञान भूमिका बनावतभयो पुनि नवगाड़ कहे नवद्वार बनावत भयो
बहत्तर पाटकहे बहत्तर कोठा अथवा बहत्तर हजारनस बनावत भयो ॥ २ ॥
ता पट तूल न गजन अमाई पसन सर अढ़ाई ।
तामें घटै बढ़ै रतिवो नहिं कर कच कर घरहाई ॥ ३ ॥
तापट कहे तौन जो है शरीर संसाररूपी पट तामें जब अहंब्रह्म भ्रमरूप तूल-
रह्यो तबतो गजमें नहीं अमातरह्यो कहे अप्रमेय रह्यो है । औ सेरकहे सिंहरूप
रह्योहै संसारको नाशकै देनवारो रह्योहै । सो संसारी हैकै जैसे सूतपैसा को
अढ़ाईसेर बिकाय है तैसे यह जीवात्मा बिषयरूप पैसाको चाहिकै अढ़ाई
सेरद्वैगयो । एकै पृथ्बीको विषय सुख चाहैहैं एकै यज्ञादिक करिकेस्वर्ग-