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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 273

शब्द । (२२३)
नहींजान्यो, तौ हम यहकहैं हैं कि, जिनको कबीरंजी आगे वर्णन करिआंयेहैं
तेई नहीं जान्यो तौ तुम्हीं कैसेजान्यो ? जो कहोहम अपने गुरुवनके बताये
जान्यो तो गुरुवनको कह्यो वाणीको कह्यो तो तुमही झूठकहौहो । जो कहो
पारिख करिकेजान्यो तो पारिखकिये तौ मन बचनके परे औ निर्गुण सगुणके
परे जे शुद्ध जीवात्मा सदा रघुनाथजीके निकटवर्त्तीते औरश्रीरामचन्द्र येई
आवैहैं वेद शास्त्रमें प्रमाण मिलै हैं तुमपारिखकहिके मनबचनके परेकौन पदार्थ-
राख्यो है । जोकहो हमजीवात्माको मानैं हैं औ कोई ब्रह्मको मानैहैं तौ आत्मा
औ ब्रह्म येहू नामहै बचनमें आयगयो । औ तुम जो विचारकरौहो सो मन में
आयगयो । जो कहो तुम्हीं कैसे श्रीरामचन्द्रको मनबचनके परे कहौहौ
वोऊतो मन बचनमें आय जायहैं; तौ हम पूर्व लिखिआये हैं कि, नारायण
राम अवतार लेइँहें तिनके नामरूप लीला धामके वर्णन करिके, वे जे परमप-
रुषश्रीरामचन्द्रहैं तिनको सपरिकर लक्षितकरैं हैं। वे मन बचनके परेहैं
औ यहूआगे लिखिआये हैं कि ॥ (ऐसी भांति जो मोकहँ ध्यावै। छठयें मास दर-
शं सो पावै ) ॥ सो अपनी इन्द्रियहै आपैदेखेपरे हैं जो कोई उनके प्रसन्नकरिबेको
उपायकरै है सो साहिबैके जनाये जानै है । तामें प्रमाण कबीरजी की साखी
सागरकी चौपाई ॥ (जौनैसो जोमहीं जनाऊं । बांह पकारिलोकै लैआऊं )॥
बीजकमेंलिखी है साखी ॥ (बहुबंधनतेबांधिया एकबिचाराजीव । काबलछूटै
आपनो जो न छुड़ावैपीव ) ॥ उनको वर्णन कोई जीवनहीं करिसकै है, ते-
हिते जो पारिख हम कियो सोई सांचहै जो तुम पारिखकरौहौ सोझूठहै । तुम
श्रीकबीरजीको अर्थजानते नहींहो भ्रममें लगेहो अनामा उन्हीं को नामहै अरु
वोई हैं तामें प्रमाण ॥ ( अनामासोऽप्रसिद्धत्वादरूपो भूतवर्जनात् ॥ इति
वायुपुराणे ) ॥ ६ ॥
इति बारहवांशब्द समाप्त ।
अथ तेरहवांशब्द ॥ १३ ॥
राम तेरी माया दुन्दि मच्चावै ।
गति मति वाकी समझिपरै नहीं सुर नर मुनिहिं नचावै॥१॥