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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 268

( २१८ ) बीजक कबीरदास ।
हेसंतो ! पांडे निपुण कसाई हैं काहेते कि, कसाई अविधिते मारै है वह
विधिते मारै है याते निपुण है । बकराको मारिके भैंसाके बलिदान दीबेकों
धावै है ॥ १ ॥ स्नान करिके रक्तचंदनके बड़ेबड़े तिलक दैके बैठे हैं औ
विधिसों देवीको पुजावै है अरु यह कहै है अंतर्यामी सर्वत्र है, औ बकरा मैं-
साको मूड़काटि डारै है, रुधिरकी नदी बहनलगै है तबवह आतमारामजो है
जीव ( कहे आत्माजो है शरीरतेहि बिषे है आरामजाको ) सो बिनशि जायहै
कहे शरीरते जुदा ह्रैजाय है ॥ २ ॥
अति पुनीत ऊंचे कुल कहिये सभा माहँ अधिकाई ।
इनते दीक्षा सब कोउ मांगै हँसि आवै मोहिं भाई ॥३॥
सो ऐसे ऐसे दुष्ट कसायनको अति पुनीत ऊंचे कुलके कहै हैं । अरुसभामें
उनहींकी अधिकाई है कहे शास्त्रार्थ करिके सभामें आपनिन अधिकाई राखै
है । तेहिते सबकोई दीक्षामांगै हैं कि, हमको दीक्षादै संसारते उबारिलेउ ।
सो यह देखिकै मोको हँसी आवै है कि, आपई नरकमें जाइ है तौ और
कों नरकते कैसे उबारि है अर्थात् तोहूको वही नरकमें डारिदेई है ॥ ३ ॥
पाप कटन को कथा सुनावै कर्म करावै नीचा ।
बूड़त दोउ परस्पर देखा गहे हाथ यम घींचा ॥ ४ ॥
वोई गुरुवालोग पापकटनको तो कथा सुनावै हैं रामायणादिक औ वही
कथामें वर्णन है कि, रघुनाथजी शिकार खेलै हैं । सो गुरुवालोग कहै हैं कि
तुमहूंशिकारखेलो । यहनहीं जानै हैं कि रघुनाथजी तिर्यग्योनि वालेन परदया
करी कि, ई ज्ञानभक्ति बैराग्यकैसे करेंगे याते मारिकै मुक्तिकरिदेइ हैं और हम
इनको मारेंगे तो पाप ते हमई दोऊ नरकै जायँगे । याहीते दोऊगुरु चेलाकों
परस्परनरकमें बूड़त देख्यो है तिनको नरकमें डारिबेको यमघींचही धरै हैं ।
नरकमें डारिदेहिं गे तब नरकमें गुहमूत्र खाइगो औ मारो जाइगो । औ जों
जीवनको मारिकै मांस खायो है तेई वाके मांसको खायेंगे। औ अपने २ सींगन
ते खुरनते मारेंगे । याते मांस खायो है वै जीवतही मांस खायेंगे । इहांतें
जो जीवन को वह मारचो तिनको क्षणमात्रको क्लेश है औ वहां वे जीक