कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंशब्द। (२१७)
एतीबड़ी गुस्ताखी कव नीक लगेगी। अथवा हिन्दू तुरुक की एक राहहै कहै
एक रामनाम लियेते उद्धार होईहै सो कर्मते निवृत्त ह्वैकै न हिंदू राम कहैं न
मुस्लमान खोदा कहैं आपने आपने कर्म में सब लगे हैं तेहिते माया कैसे छूटै।
अथवा न नारायणराम कह्यो कि तुम झटका मारौ न खोदा इकह्यो कि तुम
हलाल करौ ये दोऊ अपने अज्ञानते बनाइ लियो है ॥ ५ ॥
इति दशवां शब्द समाप्त ।
अथ ग्यारहवां शब्द ॥ ११ ॥
( ब्राह्मण )
संतो पांडे निपुण कसाई ।
बकरा मारि भैंसाको धावै दिलमें दर्द न आई ॥ १ ॥
करि स्नान तिलक करि बैठे विधिसों देवि पुजाई ।
आतम राम पलकमो विनशे रुधिरकी नदी बहाई ॥ २ ॥
अतिपुनीत ऊंचेकुल कहिये सभा माहिं अधिकाई ।
इनते दीक्षा सबकोई मांगै हँसि आवै मोहिं भाई ॥ ३ ॥
पाप कटनको कथा सुनावैं कर्म करावैं नीचा ।
बूड़त दोउ परस्पर देखा गहे हाथ यम घींचा ॥ ४ ॥
गाय बधै तेहि तुरुका कहिये उनते वैका छोटे ।
कहहि कबीर सुनौहौ संतो कलिके ब्राह्मण खोटे ॥ ५ ॥
संतो पांडे निपुण कसाई ।
बकरा मारि भैंसाको धावै दिलमें दर्द न आई ॥ १ ॥
करि स्नान तिलक करि बैठे विधिसों देवि पुजाई ।
आतमराम पलकमो विनशे रुधिरकी नदी बहाई॥२॥