सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

पृष्ठ 267, कुल 766 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 267

शब्द। (२१७)
एतीबड़ी गुस्ताखी कव नीक लगेगी। अथवा हिन्दू तुरुक की एक राहहै कहै
एक रामनाम लियेते उद्धार होईहै सो कर्मते निवृत्त ह्वैकै न हिंदू राम कहैं न
मुस्लमान खोदा कहैं आपने आपने कर्म में सब लगे हैं तेहिते माया कैसे छूटै।
अथवा न नारायणराम कह्यो कि तुम झटका मारौ न खोदा इकह्यो कि तुम
हलाल करौ ये दोऊ अपने अज्ञानते बनाइ लियो है ॥ ५ ॥
इति दशवां शब्द समाप्त ।
अथ ग्यारहवां शब्द ॥ ११ ॥
( ब्राह्मण )
संतो पांडे निपुण कसाई ।
बकरा मारि भैंसाको धावै दिलमें दर्द न आई ॥ १ ॥
करि स्नान तिलक करि बैठे विधिसों देवि पुजाई ।
आतम राम पलकमो विनशे रुधिरकी नदी बहाई ॥ २ ॥
अतिपुनीत ऊंचेकुल कहिये सभा माहिं अधिकाई ।
इनते दीक्षा सबकोई मांगै हँसि आवै मोहिं भाई ॥ ३ ॥
पाप कटनको कथा सुनावैं कर्म करावैं नीचा ।
बूड़त दोउ परस्पर देखा गहे हाथ यम घींचा ॥ ४ ॥
गाय बधै तेहि तुरुका कहिये उनते वैका छोटे ।
कहहि कबीर सुनौहौ संतो कलिके ब्राह्मण खोटे ॥ ५ ॥
संतो पांडे निपुण कसाई ।
बकरा मारि भैंसाको धावै दिलमें दर्द न आई ॥ १ ॥
करि स्नान तिलक करि बैठे विधिसों देवि पुजाई ।
आतमराम पलकमो विनशे रुधिरकी नदी बहाई॥२॥