कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
पृष्ठ 259, कुल 766 में से
संदर्भ में पढ़ेंशब्द । (२०९)
बावनरूप न बलिको यांचे जो यांचे सो माया ।
बिना विवेक सकल जग जहड़े माया जग भरमाया५
औ खम्भ फारिकै बाहर है कै नरसिंह रूप है नखते हिरणकशिपुके उदरको
विदारचो है तौनेन व्यापक ब्रह्म को सबकोई पतियायहे सो वे उद्धारकर्त्ता
परमपुरुष श्रीरामचन्द्र नहीं हैं । यह सब माया कियो है ॥ ४ ॥ औ बावन-
रूप है वे साहब बलिको नहीं यांच्यो है । मांगिवो पाइबो तो सब माया है
सब जगत् के जीव बिना विवेक जहड़े कहे भुलाय गये हैं । सब जीवनको
माया भरमाइ लियो है ॥ ५ ॥
परशुराम क्षत्री नहिं मारा ई छल मायहि कीन्हा ।
सतगुरु भक्ति भेद नहिं जानै जीव अमिय्या दीन्हा॥६॥
अरु वे उद्धारकर्त्ता परमपरपुरुष श्रीरामचन्द्र परशुराम है क्षत्रिन को नहीं
मार्यो है यह सब मायाही कियोहै । सतगुरु कहे सैकरन जे गुरुवा हैं ते
साहबके भक्तिके भेदको जानै नहीं हैं । जीव को ये जे नारायण हैं औ सब जे
अवतारहैं तिनही को अमिथ्या कहे मिथ्या नहीं सांच कहिकै कि, वे सांच साहब
येई हैं तिनही की जीवन को दीक्षा देइ है । सो मिथ्या है ॥ ६ ॥
सिरजनहार न ब्याही सीता जल पषाण नहिं बंधा ।
वे रघुनाथ एककै सुमिरे जो सुमिरे सो अंधा ॥७॥
औ वे सिरजनहार कहे जाके सुरतिदियो ते, ब्रह्मा विष्णु महेश आदिक
अवतार लेइहैं औ जगत्की उत्पत्ति होइहै सो सीता को नहीं बिवाह्यो, औ सेतु
नहीं बांध्यो । सो वे निर्विकार उद्धारकर्त्ता रघुनाथको औ ये
सब अवतारनको एक करिकै सबकोई सुभिरै हैं । सो जो एक करिकै सुभिरै हैं
ते अंधे हैं । काहेते कि, वे तौ रघुनाथ हैं । रघु कहिये सब जीव को तिनके
नाथ हैं वे काहेको काहू के मारनको अवतार लेइँगे । वे निर्विकार औ ये
माया सबलित द्वैकै सब अवतार लेइ हैं । जो कोई आवेजात है सो मायिकहै
सो वे निर्विकार साहब औ सविकार ये सब अवतार एक कैसे होइँगे । आ
१४