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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

पृष्ठ 257, कुल 766 में से

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पृष्ठ 257

ब्रह्ममें कहिआयेहै ते, उनकी उपासना करिकै उनको आपनेते अभेद मानि
कै उनकी शक्तिको प्राप्ति ह्वैकै जगत्के कार्य सब करैंहैं। औ जब मत्स्यादिक
अवतारलेईं हैं तब जे साकेत मत्स्यादिक हैं तिनकी अभेद भावना करिकै
उतने अवतारकी शक्ति पाइकै आपही मत्स्यादिक होइहैं ये सब साकेतमें जे
नारायणादिक सबहैं तिनके उपासक हैं उपासनामें देवको औ अपनो अभेद
मानिवो लिख्यो है ॥ “ देवोभूत्वादेवंयजेत् ” ॥ तेहिते उनकी शक्तिते ये
सबअवतार लेइहैं। जोकहो यामें कहा प्रमाणहै कि, येसब उनहींके उपास-
कहैं । तो रामनामके साहब मुखअर्थमें मकार स्वतःसिद्ध सानुनासिक है
ताको जो है मात्रा तौनेमें साहबके जे सब पार्षद हैं तिनको वर्णन करिआये
हैं । ये सब नारायणादिक रामनामहीकी उपासनाकरै हैं सो जाकी जाकी
उपासना कीन चाहै हैं ताकी ताकी उपासना रामनामहीमें ह्वै जायहै रामना-
मकी ये सब उपासनाकरै हैं तामें प्रमाण ॥ “ नारायणःस्वयंभूश्चशिवश्चेन्द्रा-
दयस्तथा । सनकाद्याश्च योगीन्द्रानारदाद्यामहर्षयः ॥ सिद्धाः शेषादयश्चैवलोम-
शाद्यामुनीश्वराः । लक्ष्म्यादिशक्तयःसर्वाःनित्यमुक्ताश्चसर्वदा ॥ मुमुक्षवश्च
मुक्ताश्चऋषयश्चशुकादयः । तत्प्रभावंपरंमत्वामंत्रराजमुपाँसैंते ॥ इतिवसिष्ठसंहि-
तायाम् ॥ ” जो कहो ये सब रामनाममें साहबमुख अर्थ तौ जान्यो मायिक
काहेभयो ? तौ बिना माया सबलित भये जगत्के कार्य नहीं ह्वै सकै हैं तेहिते
ये सब माया सबलित ह्वैकै कार्यकरै हैं । परन्तु जैसे इतर जीवनके जन्म
मरण होईहैं तैसे इन के नहीं होईहैं । जब महाप्रलयभई तब, सबजीव साहब
के लोक प्रकाशमें समष्टिरूप रहै हैं जब उत्पत्तिभई तबफिरि, कर्मकरिकै उत्प-
त्तिहोइहै । औ ये सब नारायणादिकनकी उत्पत्ति प्रलय नहीं होइ है । काहेते
कि ईश्वरहैं, जब महाप्रलयभई तब जे साकेत लोकमें नारायणादिकहैं ते,
इनके अंशीहैं उपास्यहैं तहां लीन ह्वैकै रहेजाइहैं । उत्पत्ति समयमें समष्टि जीव
व्यष्टि होन चाहैंहैं तब राम नाममें जगत् मुख अर्थको भावना करै है, तब
साकेतनिवासी जे नारायण हैं तिन्हें तिनके अंशई सब पांच ब्रह्मरूपते प्रकट
होइहैं । साकेतमें जे नारायणादिकहैं ते अमायिकहैं, औ तिनके अंश नारायणा-
दिक मत्स्यादिक अवतार लैकै आवै जाय हैं ते माया सबलित हैं । सो ये सब