कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २०६ ) बीजक कबीरदास ।
ई सब काम साहबके नाहीं झूठ कहै संसारा ॥ ३ ॥
खंभ फारि जो वाहर होई ताहि पतिज सबकोई ।
हिरणाकुश नख उदर विदारे सो नहिं कर्त्ता होई ॥ ४ ॥
वावन रूप न बलिको यांचे जो यांचै सो माया ।
विना विवेक सकल जग जहड़े माया जग भरमाया ॥ ५ ॥
परशुराम क्षत्री नहिं मारा ई छल माया कीन्हा ।
सतगुरु भक्ति भेद नहिं जाने जीव अमिथ्या दीन्हा ॥ ६ ॥
सिरजनहार न व्याही सीता जल पषाण नहिं बंधा ।
वे रघुनाथ एककै सुमिरे जो सुमिरै सो अंधा ॥ ७ ॥
गोपी ग्वाल गोकुल नहिं आये करते कंस न मारा ।
है मिहरवान सबनको साहब नहिं जीता नहिं हारा ॥ ८ ॥
वे कर्त्ता नहिं बौद्धकहावैं नहीं असुरको मारा ।
ज्ञान हीन कर्त्ता के भरमें माया जग संहारा ॥ ९ ॥
वे कर्त्ता नहिं भये कलंकी नहीं कलिंगहि मारा ।
ई छल बल मायै कीन्हा यतिन सतिन सब टारा ॥ १० ॥
दश अवतार ईश्वरी माया कर्त्ताकै जिन पूजा ।
कहै कबीर सुनो हो संतौ उपजै खपै सो दूजा ॥ ११ ॥
अवतार विचार ।
अबतक सबके गुरुश्रेष्ठ परम परपुरुष श्रीरामचन्द्रको वर्णन करिआये ति-
नके द्वारमें नारायणादिक मत्स्यादिक रहे आवैहैं ते अमायिकहैं काहेते कि आवै
जायनहीं हैं तिनहीको परात्पर ब्रह्म करिकै वर्णतहैं तामें प्रमाण ॥ ( पूर्णमदः
पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदुच्यते । पूर्णस्यपूर्णमादायपूर्णमेवावशिष्यते इतिश्रुतेः ) ॥ ”
औ ई माया ते परे हैं औ बहुधा निरंजननादिक जे नारायणहैं जिनको पांच