कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंशब्द । (२०१)
एकही हैं । आपसमें लड़िलड़िकै मरिगये मर्म कोई न जानतभये की जो है
राम है, वही रहिमान है । साहब एकई है, दूसरो नहीं है सब नाम 'कारको
हैं तामें प्रमाण ॥ "सर्वाणिनामानियमाविशंतीतिश्रुतिः" सो ॥ सब 'वत-
वाहीमें घटित होयहैं ॥ ६ ॥
घरघर मंत्र जे देत फिरतहैं महिमाके अभिमाना ।
गुरुवा सहित शिष्य सब वूड़े अन्त काल पछिताना ७॥
घरघर जे मंत्र देतफिरतहैं अपनी महिमाके अभिमानते कि, हम सिद्ध हैं
योगी हैं पीर हैं औलिया हैं ऐसेजे गुरुवा हैं । ते यही अभिमानते सबकी रक्षा
करनंवारे जे परमपुरुष श्रीरामचन्द्र हैं तिनको भुलाइकै, सब जीवनको और
और में लगाइ देइहैं औ कहै हैं कि, हम उद्धारकै देइहैं । गुरुवा सहित सब
शिष्य बूड़िजाइँगे औ जब यमकेर मोंगरा लगैगो तब पछितायगो कि, हमपरम
पुरुष श्रीरामचन्द्रको भजन न कियो जे सबके रक्षक हैं ॥ ७ ॥
कहहि कबीर सुनोहो संतो ई सबभर्म भुलाना ॥
केंतिक कहौं कहा नहिं मानै आपहि आप समाना॥८॥
सो कबीरजी कहै हैं कि, हे संतो तुम सुनो ये सब भर्मईमें भुलान रहे हैं
मैं चारौ युगमें केतनौ समुझाऊंहौं पै मानै नहीं हैं । यद्यपि माया ब्रह्मकी एती
सामर्थ्य नहीं है कि, यह जीवको धरिलैजाय काहेते कि, वह जीवहीको अनु-
मानहै । सो यह आपनेनते आप यही भर्ममें समाइगयो है कि, मैं
ब्रह्महौं । आप आपहीते यह माया ब्रह्मसो आपस मानलियो है अर्थात् संगति
कैलियो है तेहिते संसारी द्वै गयो ॥ ८ ॥
इति चौथाशब्द समाप्त ।
१ इस चरणका पाठ दाना पुरकी पंक्तिमें ऐसा है । "केतिक कहौं कहा नहिं
मानै सहजे सहज समाना"