कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १९८ ) बीजक कबीरदास ।
औ बहुते पीर औलियनको देखे किताब कुरानके पढ़नवाले ते जीवनकों
मुरीद कहे शिष्य करिकै मुरगी बकरीके हलालकरै कि तदबीर बतावैं हैं औ
आपौ हलाल करै हैं ॥ ३ ॥
आसनमारि डिंभ धरि बैठे उनमें बहुत गुमाना ।
पीतर पाथर पूजन लागे तीरथ गर्व भुलाना ॥ ४ ॥
औ कोई चौरासी आसन कैकै प्राण चढ़ायकै डिंभधरि बैठे हैं कि, हमारे
बरोबरि कोई सिद्ध नहीं है यही मनमें गुमान करैं हैं । यह योगिनको कह्यो ।
औ कोई पीतरकी मुर्ति कोई पाथरकी मुर्त्तिपूजै हैं औ सर्व भूतमें व्यापक जो
भगवान् तिन भूतनोंको द्रोहकरै हैं ते अज्ञानी हैं साहबको नहीं जानै हैं । तामें
प्रमाण ॥ " अहमुच्चा वचैर्द्रव्यैः क्रिययोत्पन्नयानघे ॥ नैवतुष्येऽर्चितोर्चायां
भूतग्रामावमानिनः ॥ १ ॥ यस्यात्मबुद्धिः कुणपेत्रिधातुके स्वधीः कलत्रादिषु-
भौम इज्यधीः ॥ यत्तीर्थबुद्धिः सलिलेनकर्हिचिज्जनेष्वभिज्ञेषुसएवगो खरइतिभा-
गवते ॥ " औ कोई तीर्थनमें लागै है । सो इनहीके गर्व में सब भुलाने हैं
कि, हम मुक्त ह्वै जायेंगे ॥ ४ ॥
माला पहिरे टोपी दीन्हे छाप तिलक अनुमाना ।
साखी शब्दै गावत भूले आतम खबरि न जाना ॥ ५ ॥
अब कबीरपंथिनको नानापंथिनको कहै हैं कि, माला पहिरे हैं टोपी दीन्हे
हैं औ नाकतेलैकै अच्छिद्र ऊर्ध्व तिलक दीन्हे हैं ताहीके अनुसार छाप पागे हैं
या कहैं हमको गद्दीकी छाप भई है हम महन्त हैं पान पायोहै औ साखी
शब्द गावतहैं पै वाको अर्थ भूले हैं साखी शब्दमें जो साहबको रूप बतावैं हैं
जीवात्माको सो नहीं जानै ॥ ५ ॥
हिंदू कहै मोहिं राम पियारा तुरुक कहे रहिमाना ।
आपसमें दोउ लरि लरि मूये मर्म कोइ नहिं जाना॥६॥
सो हिन्दूतो कहैं हैं कि, वेद शास्त्रमें रामही पियारा है औ मुसल्मान कहैहैं
कि, रहिमानही पियाराहै । यहदिविधा लगायराख्यो है या न जानतभये कि,