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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 247

शब्द । ( १९७ )
कहै कबीर सुनो होसंतो ई सब भर्म भुलाना ।
केतिक कहौं कहा नहिं मानै आपहि आप समाना ॥८॥
सन्तो देखत जग बौराना ।
सांच कहौं तौ मारन धावै झूठे जग पतियाना ॥ १ ॥
हे संतो ! यह जगत् देखत देखत बौराई गयो । यह जानै है कि, यह
कल्पना मनहीं की है । एकनको दुःखपावत देखै है, एकनको भूतहोतदेखै है,
एकनको रोगग्रसित देखै है, एकनको घोड़े हाथी चढ़े देखै है, एकनको राजा
होतदेखै है औ एकनको मरतदेखै है । आपहू मरघट ज्ञान कथै है कि, ऐसें
ही हमहूं मरिजाइँगे । सो यहिं देखत देखतहू भुलाइ जाइहैं । परम परपुरुष
ज श्रीरामचन्द्र हैं तिनको भजन नहीं करै है, जाते संसारते छूटै । जो सांचब-
ताऊं हौं कि, सांच जे परम परपुरुष श्रीरामचन्द्रहैं, जो चित् अचित्में व्यापक
हैं, सब ठौर बने हैं, तिनमें लगौ जाते उबार है तौ मारन धावै है । औ झूठे
जे माया ब्रह्म हैं तिनके विस्तारके जे नाना मत हैं तिनमें जो कोई लगावै है
तौ तिनको सांच मानिकै पतियात जाय ह ॥ १ ॥
नमी देखे धर्म्मी देखे प्रात कराहिं असनाना ।
आतम मारि पषाणाहिं पूजैं उनमें कछू न ज्ञाना ॥ २ ॥
बहुत नेमी धर्मी देखे हैं, बहुत प्रातःस्नान करनवालेनको देखे हैं, स्वर्ग
कों जाय हैं । औ आत्माको मारिकै कहे भगवान्को मंदिर शरीरमें साक्षात्
सबके हृदयमें भगवान् अंतर्यामी रूपते बसे हैं, तौने शरीरको फोरिकै, मेढ़ा
महिषादिकनको मूडलैके, पीतर पाथर आदिक जे देवीकी मूर्ति हैं तिनमें चढ़ा-
वै हैं । औ सबके उद्धार हैबेको बतावै हैं, तौ इनमें कौन ज्ञान है ? कछू
ज्ञान नहीं है काहेते कि साहबको सर्वत्र नहीं जानै हैं ॥ २ ॥
बहुतक देखे पीर औलिया पढ़ैं किताब कुराना ।
करि मुरीद तदवीर बतावैं उनमें यहै जो ज्ञाना ॥ ३ ॥