कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसाहबको रूप सब संसार याको सूझिपरै औसाहबके रूपते बाहिरे औकुछ वस्तु
न सूझिपरै । सुरतिरुपी जो बाणहै सो जगत्मुख ब्रह्ममुख ईश्वरमुख
जीवात्मामुख है रहाहै सो उलटा कहे उलटिकै पार्थिवकहे राजा जे परम-
पुरुष श्रीरामचन्द्रहैं तिनमें लगावै । यहबात जो कोई शूरा होइ कहे ब्रह्मज्ञा-
न ईश्वरज्ञान जीवात्मज्ञान की एक आत्मै सत्यहै तिनको जीति लेइ
सो बूझै तबहीं जन्ममरण याको छूटै है ॥ ५ ॥
गायन कहै कवहूं नहिं गावै अनबोला नितगावै ॥
नटवर वाजी पेखनी पेखै अनहद हेतु बढ़ावै ॥ ६ ॥
गायन जोहै वाणी वेदशास्त्र पुराण सो तात्पर्य करिकै अनिर्वचनीय साहबको
कहैं हैं तौनेको तौ कबहूं नहीं गावैहै और अनबोला जो निराकार धोखा ब्रह्महै
जो कबहूं बोलते नहीं है, सो कैसे पूरपरै । कौनीतरहते अनबोलाको गावै हैं सो
आगे कहै हैं । वह जो धोखा ब्रह्मको देखनोहै सो नटवत् बाजी है कहे झूठै है
वहां कछु नहीं देखि परै है जो कहो अनहदको हेतु तो बढ़ावैहै कहे दशौधुनि
अनहद की तौ सुनि परै है ॥ ६ ॥
कथनीबदनी निजुकै जोहै ई सब अकथ कहानी ॥
धरती उलटि आकाशहि बेधै ई पुरुषहिकी वानी ॥ ७ ॥
सोई तो सब कथनी बदनीहै । जो विचारिकै देखौ तौ अनहद आदिकैकै
ई सब अकथ कहानी हैं। साहबके जाननवारे पूरेसंतनके कहिबे लायक नहीं है,
झूठैहैं कछु इनमें है नहीं। सबमनके अनुभवहैं । पुरुषजेहैं तिनकी यह बानीकहे
स्वभावहै । धरती जो जड़मायाहै ताको उलटिदेइहै, वाको मुख मुरकाई देइहै
वासों आप फिरि आवैहै । औ आकाश जोब्रह्महै ताको बेधैकहे ब्रह्मके पार जाय
है ताम प्रमाण ॥ "सिद्धाब्रह्मसुखेमग्ना दैत्याश्चहरिणाहताः । तज्ज्योतिर्भेदनेश-
क्तासिकाहरिवेदिनः ॥" औकुपुरुषजे हैं ते संसारमें लगे हैं कि, धोखाब्रह्ममें-
लगैहैं उनकी बानीकहे यहै स्वभावहै ॥ ७ ॥
विना पियाला अमृत अचवै नदी नीर भरि राखै ॥
कहै कबीर सो युगयुग जीवै राम सुधा रस चाखै ॥ ८ ॥
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