कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १८४ ) बीजक कबीरदास ।
सो या भांति साहवकी जे सातौभक्तिहैं ते गुप्तह्वै गईं काहेते कोऊ न जानत-
भयो सो कहै हैं नारी जोहै कारणरूपा माया सोद्वैपुरुषको प्रकटकियो एकजीव
दूसरो ईश्वर सो पांच ब्रह्मईश्वर प्रकट भयेहैं सो आदि मंगलमें कहिआयेहैं।
जनीप्रादुर्भावे धातुहै या जायोको अर्थ प्रकटकरबोई है औ मायाते जीव ईश्वर
प्रकटभये हैं तामें प्रमाण ॥ ( मायाख्यायाःकामधेनोर्वत्सौजीवेश्वरावुभाविति
जीवेशावाभासेनकरोति मायाचाविद्याचेतिश्रुतेः ) ॥ सो हे पण्डित ज्ञानी ! तुम
बूझौ तौ सारासारके बिचार करनवांरे सांचहौ यहवाणी जो है सोई तुम को
भरमाइ दियो है ॥ १ ॥
पाहनफोरिगंगयकनिकरी, चहुंदिशिपानी पानी ।
तेहि पानी दुइपर्वत बूड़े, दरिया लहरि समानी ॥२॥
पाहन कहिये कठिनको सो कठिन मनहै ताको फोरिकै गंगा निकसी नाना
पदार्थनमें जो राग होई है सोई गंगाहै सो वही रागरूपा मायामें परिकै जीव
संसारमें रागकरि बूडिगये। औ ईश्वर उत्पत्ति प्रलय करिकै दोनों जीव ईश्वर जे
हैं तेई दुइभारी पर्वत हैं ते बूडिगये। औ दरिया जो धोखा ब्रह्महै तामें रागरूपी
जो है गंगा ताकी जो लहरि है सो समाइ जातीभई अर्थात् सब धोखहीमें राग
करत भये, सांच वस्तुमें जिनजाना तेई बाचे अथवा वही रागगंगा लहरि संसा-
रसागरमें समाइजाती भई । सबजीव ईश्वर संसारमें रागद्वेषकरिकै बूडिगये ।
अथवा वहै जो बाणीगंगा सो पाहन जो मनहै तौनेको फोरिकै निकरी है सो
चारिउ ओर पानीपानी है रही है तौने पानी दुइ पर्बत बूडे एक जीव एक
ईश्वर औ गङ्गा समुद्रमें समानी हैं यहां बाणीरूप गङ्गको पर्यवसान दरिया
जो ब्रह्महै ताही में होतभयो ॥ २ ॥
उड़ि मक्खी तरुवर को लागी, बोलै एकै बानी ।
वहि मक्खी के मख्खा नाहीं, गर्भ रहा विनपानी ॥ ३ ॥
मक्खीजे हैं जीव ते तरुवर जो है देह तामें उड़िकै आपने आपने बासननते
लागतभये अर्थात् प्रलय जबभई तबभई तब वही ब्रह्ममें लीनभये, पुनि
जबसृष्टिभई तब पुनि शरीर पावत भये ॥ अथवा मक्खी जेहैं जीव ते संसार