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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 237

अथ शब्दः प्रारभ्यते ।
पहलाशब्द ॥ १ ॥
संतौ भक्ति सतौगुरु आनी ।
नारीएक पुरुषदुइ जाये बूझोपंडितज्ञानी ॥ १ ॥
पाहनफोरिगंगयक निकरी चहुंदिशि पानीपानी ।
तेहिपानी दुइपर्वतबूड़े दरियालहरि समानी ॥ २ ॥
उड़िमक्खी तरुवरके लागी बोलै एकैबानी ।
वहिमक्खीके मक्खानाहीं गर्भरहा बिनपानी ॥ ३ ॥
नारीसकल पुरुषवहिखायी ताते रहेउ अकेला ।
कहै कबीर जो अबकी समुझै सोईगुरु हमचेला ॥ ४ ॥
सन्तौभक्तिसतोगुरुआनी ।
नारीएकपुरुषदुइजाये बूझोपण्डितज्ञानी ॥ १ ॥
हे सन्तो ! हे जीवौ ! तुमतो शांतरूपहौ । गुरुजे हैं सबते श्रेष्ठ परम पुरुष
श्रीरामचन्द्र तिनकी सतोकहे सातो जे भक्ति हैं ते आनी कहे आनई हैं अर्थात
सगुण निर्गुणके परे मनबचनके परे है कौन सातभक्ति हैं ते कहैं हैं “ शांत ”
प्रथम ताकर द्वैभेद १ सूक्ष्मा २ सामान्या । सो शांतिके सूक्ष्माके साम-
न्याके जुदे जुदे लक्षण हैं ताते तीनि भक्ती ये हैं । औ १ दास्य २ सख्य ३
वात्सल्य ४ शृङ्गार चारि येमिलाय सातभक्ति भईं । सोई जे हैं सा तौ रसहैं
ते मन बचन में नहीं आवै हैं जब प्राप्तिहोइहैं तबहीं जानिपरैहै कि ऐसे हैं ।