कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १८४ ) बीजक कबीरदास ।
बुझावै सो गुरुनहीं मिलै है इहांदुःखसंताप कष्ट तीनबार जो कह्यो तामें कुछ
भेद है दुःख वह कहावै है जो काहूह मारे होइहै औ जो रोगादिकन करिकैहोइ
है सो संकष्टकहावै है औ जो कोई हानिते होइहै सो संताप कहावै है ॥ ६ ॥
मोरतोरमें जरजग सारा । धिगजीवन झूठो संसारा ॥७॥
झूठेमोहरहाजगलागी । इनतेभागि बहुरि पुनिआगी ॥८॥
जेहितकै राखे सबलोई । सो सयान बाचे नहिं कोई ॥९॥
औ तोर मोर करिकै सब संसार जर जाइ हैं यहसंसार साहब को चिद्रूप
करिकै नहीं देखै वे यह संसारको संसाररूप करिकै देखै हैं यही झूठो है सो
ऐसे झूठे संसारमें जीवनको जीबेको धिक्कार है ॥ ७ ॥ मायाको जो मोहहै
सो सब संसारमें लगिरह्यो है सो झूठो है इनते जो कोई भागिबेऊ
कियो तौ फेरि वही झूठे ब्रह्माग्निमें जरै है ॥ ८ ॥ जेने सबलोई कहैं
लोगन को हितकै राखे हैं ते सयान कालसे कोई नहीं बचै हैं तू कैसे
बचैगो ॥ ९ ॥
साखी ॥ आपुआपु चेतैनहीं, औ कहौतौ रिसिहा होइ ॥
कहकबीरसपनेजगै, निरास्तिअस्तिनाहिंकोई ॥१०॥
आपु आपुकहै अपने स्वरूपको नहीं चेतै है कि मैं परमपुरुष श्रीरामचन्द्र-
केहौं सो मैं जो समुझाऊं हौं तौ रिसहा होइ है सो कबीरजी कहै हैं कि जो-
सपने जागै सपन कहा है देहको अभिमानी मनमुखी है जागे कहै अपने
मनते यह बिचारिलेइ कि मैं जाग्यो मैं ब्रह्म है गयो अथवा आपनेको जान्यो
मैंहीं सबको मालिकहौं और कोई दूसरो छोड़ावनवारो नहीं है म अपने क।
जान्यो सो छूटिगयो सो कोई साहबको न मान्यो सो निरस्तिकहे नास्तिक है ।
सो अस्तिकहे आस्तिक न होइहै सो कहा जागैहै नहीं जागै है अर्थात् वह
ज्ञानतो धोखाहै संसार समुद्र ते तेरी रक्षाकहा करैगो ताते वहसाहबको समु-
झिजाते तेरोसंसार समुद्रते उवार करिदेइ ॥ १० ॥
इति चौरासिवीं रमैनी सम्पूर्णा ।
इति ।