कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १८२ ) बीजक कबीरदास ।
धारण करनेवाला जो जीव क्षत्री सो पत्री कहे पक्षी है जौने वृक्षचारिउ युगमें पक्षीद्वै
गयो अथवा क्षयमान जे नवगुण हैं तिनको धारणकीन्हे जो जीव सोई पत्री कहे
पक्षी है नवगुण कौन हैं सुखदुःख इच्छा प्रयत्न राग द्वेषधर्माधर्म भावना
यहितरहको जीव जो है पक्षी सो पापपुण्य फल ताको खाइबेको चारिउयुग
अधिकारीहै ॥ २ ॥ तिन फलनमें बहुतस्वादहै कछु कहो नहीं जायहै
तेहीवृक्ष में जीवरूप पक्षी चरित्रकरै है सो आगे कहैं ॥ ३ ॥
नटवरसाजसाजिया साजी । सो खेलैसो देखै बाजी ॥४॥
मोहावपुरा युक्तिन देखा । शिवशक्ती बिरंचिनहिंपेखा ॥५॥
नटके बेटा कैसी साज साजि कहे नानारूप धारण करिकै आवैजाय है जो
वाजीगर जौने खेलखेलै है तौने देखै है अर्थात् जे ब्रह्ममें लगेते ब्रह्मही देखै हैं जे
जीवात्मामे लगैहैं ते जीवात्मैको देखैहैं इत्यादि जो जौने मतमेंहैं सो ताही में
लगोहै सांच बताये लरैधावै है काहे ते उनकी वासना अनेक जन्म ते वही
है ॥ ४ ॥ गुरुवाकारिकै मोहा जो वपुराजीव है सो साहबके जानिबे की युक्ति
न देखत भयो शिवशक्त्यात्मक जगत् पूर्व कहिआये हैं सो या शिवशक्ति बिरंचि
मायारूप या बात न जानतभये ॥ ५ ॥
साखी ॥ परदे परदे चलिगया, समुझि परी नहिंवानि ॥
जो जानै सो वाचि है, होत सकलकी हानि ॥ ६ ॥
परदे परदे कहे बिना साहबके जाने संसारमें जीव चलिगया कहे संसारमें
जातरहा बाणी जोहै वेद शास्त्र सो तात्पर्य करिकै साहबको बतावैहै सो जीव-
को न समुझिपरयो जो कोई वेदशास्त्रादि में तात्पर्य करिकै परमपुरुष पर
श्रीरामचन्द्रको जानै सोई बाचैहै अपरोक्ष अर्थ जगत्मुख जानिकै सबकी हानि
होतही जाय है ॥ ६ ॥
इति बयासिर्वीं रमैनी समाप्त ।