सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

पृष्ठ 23, कुल 766 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 23

(२०) कबीरजीकी कथा ।
श्रीजगदीश पुरी यहि काला । गई आगि लागि पाकहि शाला ॥
पुरी पठायो तुरत सवारा । पुरी लोग सब कियो उचारा ॥
जो कबीर वह दिन न बुझावत । तौ सिगरी नगरी जरि जावत ॥
यह सुनि भूपति बहुतं डेराना । रानी सों अस वचन बखाना ॥
हैं कबीर मूरति भगवाना । याको हम कीन्हो आपमाना ॥
ताते अब अस करहु विधाना । पैदल तेहिं ढिग करहिं पयाना ॥
त्राहि त्राहि कहि चरणन गिरहीं । जो वह कहै तबै घर फिरहीं ॥
अस विचारि राजा अरु रानी । राज विभव तहँ तजि डर मानी ॥
पैदर चले सुलाज विहाई । सचिव प्रजा सबै लिय पछि आई ॥
दोहा-राजा रानीकी विनय, सुनि कबीर मतिधीर ॥
बहत नीर हग पीर बिन, कियो धीर युत भीर ॥ ७ ॥
तहँ कवित्त प्रियदास यह, कीन्हो सुभग बखान ॥
सो मैं इत लिखि देतहौं, श्रोता सुनहु सुजान ॥ ८ ॥
कवित्त-कही राजा रानी सो जो बात यह सांच भई आंच लागी हियें
अब कहो कहा कीजिये । चलेही बनत चले शीश तृण बोझ भारी गरे सो
कुल्हारी बांधि तिया संग भीजिये ॥ निकसे बजार ह्वैकै डारि देई लोक लाज
कियो मैं अकाज छिन छिन तन छीजिये । दूरि ते कबीर देखि ह्वै गये अधीर
महा आये उठि आगे कह्यो डारि मति रीझिये ॥ १ ॥
रह्यो सिकंदर शाह सुजाना । सुनेहु कबीर प्रभाव महाना ॥
तब लिखि पठयो येक खलीता । सुनियत तुम्हें कबीर पुनीता ॥
न्याय ब्याकरण शास्त्र अनंता । करै एक जेहि संमत संता ॥
हिंदू मुसलमान दोउ दीना । निज निज मत देखो सुख भीना ॥
ऐसो शास्त्र देहु पठवाई । तो हम जानै अजमत भाई ॥
तब कबीर लिखि उतर पठायो । सहस शकट कागज पठवायो ॥
ऐसो सुनि कबीर खत शाहा । अति विस्मित ह्वैकै मनमाहा ॥
सहस शकट भरि कागज़ कोरा । पठयो दूत कविरकी ओरा ॥
सहस शकट कागज़ जब आयो । तब कबीर अति आनंद पायो ॥