कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंरमैनी । ( १७१ )
साखी ॥ कहाहिं कबीर पुकारिकै, वा पन्थे मतभूल ॥
जेहिराखे अनुमानकरि, सो थूलनहीं स्थूल ॥१०॥
तेहिसाहबकेलागोसाथा । दुइदुखमेटिकेहोहुसनाथा ॥ १ ॥
जिनको पूर्व कहि आयेहैं ते हरि कहे रक्षक मन वचनके परे परमपुरुष जे
श्रीरामचन्द्र है तिनके साथमें लागो दूनों जे दुःख हैं निर्गुण और सगुण
तनका मेटिकै सनाथ होउकहे नाथ जे साहबहैं तिनते सहित वह साहब कै-
सोहै कि धोखाब्रह्महै नहीं है औ कौन्यो अवतारमें नहीं है अर्थात् निर्गुण सगु-
णके परे हित वह साहब कैसो है कि धोखाब्रह्महै नहीं है औ कौन्यो अवतार
में नहीं है अर्थात् निर्गुण सगुणके परे है कबहूं जब कौन्योकल्प में बाणनके
युद्धकी इच्छा होइहै तब आपही प्रकट हैकै प्रतापी नामको रावणहोइहै तासों
बाणनको युद्ध करैहै औ फिर शरीर सहित को चले जाइहै औ बहुधा जे अव-
तार होइहैं ते नारायणै अवतार लेइहैं ॥ १ ॥
दशरथकुलअवतरिनहिंआया। नहिंलङ्काकेरायसताया॥२॥
नहिंदेवकिकेगर्भहिआया। नहिंयशोदागोदखेलाया ॥ ३ ॥
पृथ्वीरमनदमननहिंकरिया।पैठिपताल नहिंवलिछलिया ४
श्रीकबीर जी कहे हैं कि, वे श्रीरामचन्द्र कौन्यो अवतार में नहीं हैं दश-
रथ के यहां अवतार नहीं लियो दशरथ के यहां अवतारलै नारायणै रावणको
मारै हैं ॥ २ ॥ अरु वे साहब देवकी के गर्भ में नहीं आयो अरु वाको
यशोदा गोदमें नहीं खेलायो ॥ ३ ॥ अरु वे साहब पृथ्वी रमण है कै म्ले-
च्छनको दमन अर्थात् बामन रूप नहीं धरयो ॥ ४ ॥
नहिंवलिरायसोंमाड़ीरारी। नहिंहिरणाकुशवधलपछारी ५॥
बराहरूपधरणीनहिंधरिया । क्षत्रीमारिनिक्षत्रनकारिया॥ ६॥
नहिंगोवर्द्धनकरगहिधरिया। नहिंग्वालसँगवनवनफिरिया७
अरु वे साहब बलिरायसों रारि नहींमांड्यो कहे मोहनीअवतारलै देवतनको
अमृत पिआय दैत्यनको बारुणीपिआय बलिसों युद्धकरि दैत्यनको विष्णुरूप है