कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १७० ) बीजक कबीरदास ।
बाणी में सब मरि मरि समाइ है और पुनि वहीते उत्पत्ति होइहै औ जोन
सबजीवको फंडायेहै तौनीही बाणीमें कहे सब आचारकरैहैं अथवा वही बाणीकों
आचरणकरै है अपनेको ब्रह्ममानैहै काहूको आचार ठीक नहीं है ॥ ६ ॥ यह
बाणीके फंदते बाहरह्वैकै परमपुरुष जे श्रीरामचन्द्रहैं तिनमें जो लागै तो पुनि
जगतके पन्थको न जोहै अर्थात् फिरि न जगतमें आवै ॥ ७ ॥
साखी ॥ भर्मकवांधलईजगत, कोइनाहिंकियाविचार ॥
हरिकीभक्तिजानेबिना, भवबूड़िमुवासंसार ॥८॥
यहि भांति भर्म जोमाया सबलित ब्रह्म त्यौहिकरिकैबँध्यो जो यह संसारहैं
ताको कोई नहीं बिचार कियो हरि कहे सबके कलेश हरनहारे वेद तात्पर्यार्थ
जे श्रीरामचन्द्रहैं तिनकी भक्ति के बिनाजाने भर्मके समुद्रमें संसार बूड़ि मुवा
कहे संसारीजीव बूड़ि मुयो ॥ ८ ॥
इति चौहत्तरवीं रमैनी समाप्त ।
अथ पचहत्तरवीं रमैनी ।
चौपाई ।
तेहिसाहवके लागोसाथा । दुइ दुखमेटिंकै होहुसनाथा॥१॥
दशरथकुलअँवतरिनहिंआया।नहिंलंकाकेरायसताया॥२॥
नहिं देवकिक गर्भहिआया।नहींयशोदा गोद खेलाया॥३॥
पृथ्वीरमनदमननहिंकारिया ।पैठिपतालनहींवलिछलिया४
नहिंवलिरायसोमांडीरारी । नहिंहिरणाकुशबधलपछारी५
वराहरूपधरणीनहिंधरिया।क्षत्रीमारि निक्षत्रनकरिया॥६॥
नहिंगोवर्द्धनकरतेधरिया । नहींग्वालसँगबनबनफिरिया ७
गण्डकशालग्रामनशीला।मत्स्यकच्छह्वैनहिंजलहीला॥८॥
द्वारावती शरीर न छांड़ा।लै जगनाथ पिंड नहिं गाड़ा॥९॥