सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

पृष्ठ 212, कुल 766 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 212

( १६२ ) बीजक कबीरदास ।
बोलाना कासोंबोलियेभाई । बोलतही सवतत्त्वनशाई॥१॥
बोलतबोलतवाढु विकारा सोवोलियो जो परैविचारा ॥ २ ॥
बैरागिनकी संन्यासिनकी दशा जैसी हैरही है सो पूर्बकहिआये सो ऐसे
पाखंडी संसारमें है रहेहैं बोलानाकासों बोलिये बोलतहीमें सब तत्त्व नशाइ
जाइहै। तत्त्वकहावैहै यथार्थ सो साहब के जे नामरूप लीला धाम यथार्थ हैं ते नशाइ
जाइहै कहे भूलिजाइहैं ॥ १॥ बोलत बोलत बिकारई बाढ़ैहै ताते सो बात बोलि-
ये जेहिते साहब के नामादिकन को बिचार ठीक परिजाइ कौनी तरहते सांच
बिचार ठीक परै सो कहै हैं ॥ २ ॥
मिलैजोसंतवचनदुइकहिये । मिलैअसंतमौनह्वैरहिये ॥३॥
पण्डितसोंबोलियहितकारी । मूरखसोंरहियेझखमारी॥४॥
जो संत मिलैतो द्वैबचन कहबऊ करिये द्वैबचन कह्योताको भाव यहहै कि
थोरई अपने मयोजन मात्र बोलिये औ सत्संग करिये काहेते कि उनके सत्संग
किये बिचार बाढ़ैहै औ असंत मिलै तो मौन ह्वै रहिये बोलिये न काहेते कि
उनके संगते अज्ञान बाढ़ै है ॥ ३ ॥ तेहिते पंडितसों बोलिबो हितकारीहै काहेते
कि पंडित जेहैं ते सारासारको विचार करिकै सार पदार्थ जे साहब तिनको
ठीक करिकै असार जोहै धोखा ब्रह्म औ माया ताको छोड़ि दियोहै वे साहबको
बतावेंगे औ मूरख सों बोलिबो झकमारीहै काहेते कि जो मूरख सों बोलै तौ
अपने स्मरणकी हानिहोइ है वह तो समझायेते समझैगो नहीं तबआपही झक-
मारि कै रहिजाइगो पीछे क्रोध होइगो अरु मूरख नहीं समझैहै तामेंप्रमाण
गोसांई जीको॥ सोरठा ॥ “फूलैनफूलैबेत, यदपिसुधाबरषैजलद॥ मूरखहृदयन-
चेत, जोगुरुमिलैंबिरंचिसम” ॥ १ ॥ पानीकोपान भीजै तो बेधैं नहीं । त्यों मूर-
खको ज्ञान बूझावै तौ सूझैनहीं ॥ ४ ॥
कहकबीरई अधवट डोलै । पूराहोय विचार लैबोलै ॥ ५ ॥
श्रीकबीरजी कहैंहैं कि जे सत्संगऊ करैं हैं औ मूरखहू सों बोलै हैं शास्त्रार्थ
करै हैं औ और और मतको सिद्धांतको जानो चाहैंहैं कि हमारे मत ठीकहै कि
औरऊमतठीकहै परमपुरुष श्रीरामचन्द्र सबते परे हैं यह सिद्धांतको निश्चय नहीं है