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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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रमैनी। ( १६१ )
कारिकै रोजगार करै हैं सोना पहिरि कै बानाको लजावै हैं ॥ ७ ॥ औ
घोरा घोरी हाथी बहुत आपने संगलेत भये औ काहू राजाते गांव पायो करोर-
पती है या यश चलायो बड़े ज्ञानीहैं बड़े भक्तहैं या यश चलायो ॥ ८ ॥
साखी ॥ तियसुन्दरी न सोहई,सनकादिक के साथ ॥
कवहूंक दाग लगावई, कारी हांडी हाथ ॥ ९ ॥
लाव लश्कर में स्त्री साथ रहतई है सनकादिक जटाधारे वैष्णवनको कहैहैं
अथवा सनकादिक कहे जिनकी पांच वर्षकी अवस्था बनीरहैहै ऐसेब्रह्माकेपुत्र
तिनहूको या मजाहोयतोकबीर जी कहै हैं कि संन्यासिनके साथमें सुन्दरीका सों-
हहै ? नहीं सोहैहै कबहूं दाग लगावतईहै जैसे कारी हांडी हाथमें लेइँ तो दाग
लागिही जायहै ऐसे जिनके जिनके संगमें स्त्रीरहैहै ते पाखंडिनको दाग लगतै है
स्त्रीनते नहीं बचैहैं। नामके तोसंन्यासी बैरागीहैं अखाड़ा गृहस्थी बांधेहैं तहां स्त्री
आवई चाहैं सो दाग लगावई चाहैं अथवा ऐसे पाखंडीहैं ते माया रूपई ह्वैरहेहैं तेई
मायारूपी सुन्दरी कहे स्त्रीहैं तिनको संग न करै औ जो संग करै तौ दाग लगवई
करै सो जीव ते पाखंडिनको संग न करै तामेंप्रमाण ॥(पुंसांजटाधरणमोजवतां
वृथैव मेधाविनामखिलशौचनिराकृतानाम् । तोयप्रदानपितृपिण्डबहिःकृतानां संभा-
षणादपिनराःनरकंप्रयांति ) ॥ इतिविष्णुपुराणे ॥ ९ ॥
इति उनहत्तरवीं रमैनी समाप्त ।
अथ सत्तरवीं रमैनी ।
चौपाई ।
बोलनाकासों बोलियेभाई । बोलतही सबतत्त्वनशाई॥१॥
बोलतबोलत बाढु विकार। सोबोलिय जोपरैबिचारा॥२॥
मिलैजोसंतबचनदुइकहिये । मिलैअसंत मौनह्वै रहिये॥३॥
पंडितसों बोलियहितकारी । मूरखसों रहिये झखमारी॥४॥
कह कबीर ई अधघट बोलै । पूरा होय विचार लैबोलै॥५॥
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