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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 209

रमैनी । (१५९)
जेकरे शरलागैहै सोई बाणलागे की पीर जानै सो जोः कोईसमाधि लगावै
है सोई समाधि उतरेको दुःख जानैहै सो समाधि तौ तोर लागैहै ना भागु
समाधिही लगाये रहु सो तेरो भागिबो तौ बनतई नहीं है समाधि उतरेही
आवैहै याते यह धोखा छोड़िदे कबीरजी कहै हैं सुखसिंधु जे साहबहैं तिनको
निहारु जिनको एकबार निहारे समाधि लगी रहैहै अर्थात् जो एकहूबार साह-
बके सम्मुख भयोहैः सो फिरिनहीं संसार में बच्योहै तामेंप्रमाण ॥ ( एकोपि
कृष्णस्यकृतः प्रणामो दशाश्वमेधावभृथेनतुल्यः ॥ दशाश्वमेधीपुनेरेतिजन्मकृष्ण-
प्रणामीनपुनर्भवाय ॥ इति ) अथवा जाके बाण लगै है सोई पीर जानै है सो
जो साहब में लागे हैं तेई धोखाकी पीर जानै हैं कि हमयोगमें यज्ञादिमें लगि
कै नाहक जन्म गँवाये।सो कबीर जी कहै हैं कि साहबको दुर्लभजानि तैं लागु
तौभागु न साहब सुखसिंधुहै तिनको तूनिहारु तौ ये सब धोखनकी पीर दूरि
करि देयँगे तब अपराध तेरो न गनैंगे । तामें प्रमाण॥"कथंचिदुपकारणकृतेनैके
नतुष्यति ॥ नसंमरत्यपकाराणांशतमप्यात्मवत्तया" इतिबाल्मीकीये ॥ ६ ॥
इति अड़सठवीं रमनी समाप्त।
अथ उनहत्तवीं रमैनी ।
चौपाई ।
ऐसा योग न देखा भाई । भूला फिरै लिये गफिलाई ॥१॥
महादेवको पंथ चलावै । ऐसो बड़ो महंत कहावै ॥ २ ॥
हाट वाट में लावै तारी । कञ्चे सिद्धन माया प्यारी ॥ ३ ॥
कबदत्तै मावासी तोरी । कव शुकदेव तोपची जोरी ॥४॥
कब नारदबंदूक चलाया। ब्यासदेव कब बंब बजाया ॥५॥
करहिं लड़ाई मतिकेमंदा।ईहैं अतिथि किं तरकशबंदा॥६॥
भयेविरक्त लोभमनठाना। सोना पहिरि लजावै बाना ॥७॥
घोरा घोरी कीन्ह बटोरा । गांवपाय यश चलो करोरा ८॥