सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

पृष्ठ 202, कुल 766 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 202

( १५२ ) बीजक कबीरदास ।
याबात यद्यपि मैं सौबारसमुझाऊं हौं ताहूपै ऐसो धोखाको धरचो कि छोड़ि
नहींजाय सो जे जन गुरुवाजनके कहेराहिजायहैं धोखाकोनहीं त्यागै हैं ॥ २ ॥
तेनवोनिद्धि पावै हैं औ निर्गुण सगुणके परेमैं जोबातकहौं ताकोकहाँ बूझैं ॥३॥
जेमेरोकह्यो बूझैंहैं कि हमसाहबकेहैं याधर्मजिनके हृदयमें बसैहै तेसाहबके रूप-
कसौटी में आपनो कंचन स्वस्वरूप कसतई रहैं औ जेसाहब नहींकसैहैं
गुरुवालोगनके कसावैनाईहैं तेवेबाउरऊ निराकार ब्रह्म तांमें आपही बौरायजाय
हैं जो औरको औरकहै सो बाउर है ॥ ४ ॥ ५ ॥ सो हे जीवो ! तुम साहब
के होइकै धोखा में लगे ताहीते कालकी फांसीमें परेहौ सो आपने छूटिबे को
सोच करौ देखो तो जहां संत रामोपासकहैं तहें संतजाइहैं आपनोस्वरूपजानि
छूटिजाइहैं जे गुरवालोगनको उपदेश लेइहैं ते जीव पोच पोच मिलिरहेहैं॥६॥
इति चौंसठवीं रमैनी समाप्त ।
अथपैंसठवीं रमैनी ।
चौपाई ।
अपने गुणके औगुण कहहू।यहैअभाग जोतुम न विचारहू १
तुमजियरा बहुतैदुखपाया । जलबनमीनकवनसुचुपाया २
चातृकजलहल भरेजोपासा।मेघ न वरसै चलैउदासा॥३॥
स्वांग धरचोभवसागर आसा।चातृकजलहलआशैपासा४
रामै नाम अहै निजसारू । औ सब झूठ सकल संसारू ५
किंचित है सपनेनिधिपाई । हियनमाहँ कहँ धरै छिपाई६॥
हरि उतंग तुमजातिपतङ्ग । यमघर कियो जीवको संगा७
हियनसमाय छोड़नहिंपारा ।झूठलोभ तैं कछु न विचारा८
स्मृति कहाआपु नहिंमाना । तरिवर छलछागर हैजाना ९
जियदुरमति डोलै संसारा । तेहि नहिं सूझैवारनपारा १०