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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

पृष्ठ 200, कुल 766 में से

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पृष्ठ 200

( १५० ) बीजक कबीरदास ।
साहबमें लगेहै सोई सबते श्रेष्ठ होयहैं तामें प्रमाण॥(विप्राद्विषड्गुणयुतादरविंद
नाभादारविंदविमुखाच्छ्वपचंवरिष्ठम् । मन्येतदार्पितमनोवचनेहितार्थम्प्राणं पु-
नातिसुकुलंनतुभूरिमानः ) ॥ १ इतिभागवते ॥ ६ ॥
इति बासठवीं रमैनी समाप्त ।
अथ तिरसठवीं रमैनी ।
चौपाई ।
नाना रूप वर्ण यककीन्हा । चारि वर्ण उनकाहु न चीन्हा ॥१॥
नष्टगये करता नहिं चीन्हा। नष्टगये औरहि मन दीन्हा॥२॥
नष्टगये जिन वेद वखाना । वेद पढ़ा पै भेद न जाना ॥ ३ ॥
विमलषकैरैनर नहिंसूझा।भो अयानतवकछुवनबूझा॥४॥
साखी ॥ नाना नाच नचाइकैक, नाचै नटके वेष ॥
घट घट अविनाशी वसै, सुनहु तकी तुम शेष ॥५॥
वर्ण धर्मखंडन करि आये अब सब वर्णको एक मानि जे साहबको भूलैहैं तिनको
खंडनकरैं हैं ! नानारूप जे जीवहैं तिनको एक वर्ण कहे एक रंग करि देत भयो
अहं ब्रह्मास्मि करिकै सब मानत भयो कि हमहीं सब हैं दूसरे नहीं है चारिउवर्ण
वहीको वर्णन करतभये यह न जानतभये कि यह धोखा ब्रह्मको खाई लेइहै॥ १॥
फिरिफिरि सब जीव नष्ट ह्वैगये कहे मरि गये उद्धारकर्त्ता जो साहबहै ताको न
चीन्हतभये औ औरहि जो धोखा ब्रह्महै तौनेमें मन दैके नष्टह्वैगये अर्थात् लीन
ह्वैगये साहबकोतो जाने नहीं फिर संसारी भये॥२॥जै वेदको बखानिकै पढ़िप-
ढ़िकै औरनको अर्थ सुनावै हैं तेवेदपढ़्यो परंतु भेद न जान्यो कहे वेद को
तात्पर्य जे साहब हैं तिनको न जान्यो तेहिते नष्ट ह्वैगये सब वेदको भेद साह-
बहै तामें प्रमाण ॥ (सर्वेवेदायत्पदमामनन्ति) ॥ ३ ॥ बिमलष जो साहब मन
बचनके परे ताको खंकहे आकाशवत् शून्य ज्ञान करै है कि, वह नहीं हैं
आकाशवत् ब्रह्मही पूर्ण है सो उनके ज्ञान नेत्र तौ हई नहीं हैं साहब कैसे सूझि