कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंरमैनी। ( १४९ )
जन्मतशूद्रभयेपुनिशूद्रा। कृत्रिमजनेउघालिजगधुंद्रा ॥२॥
जोतुमब्राह्मणब्राह्मणीजाये। औरराहतुमकाहेनआये ॥३॥
जब प्रथम तेरो जन्म होइहै तबतैं शूद्रई रहै है काहेतें कि संस्कार कुल-
नहीं रहैहै औ जब मरैहै तब अशुद्धई रहैहै शिखा जनेऊ दूनो आगीमें
जरिजाइहैं तबहूं शूद्रै ह्वैजाइहै सो कृत्रिम जनेऊ पहिरिकै तैं जगतमें दन्द
मचाइ दियेहै कि हम ब्राह्मण हैं ये क्षत्री हैं ये वैश्यहैं ये शूद्रहैं ॥ २ ॥
जोकहौ हम जन्म करिकै ब्राह्मण हैं ब्राह्मणीते उत्पन्न हैं और राह ह्वै काहे
आये ब्रह्मांड फोरिकै आवते आंखी के राहह्वै आवते अशुद्ध राहह्वै काहे आये
अर्थात् न ब्राह्मणी अपनी शक्तिते उत्पन्न करिसकै औ न तैं अपनी शक्ति ते
आइसकै कर्महीते ब्राह्मणी उत्पन्न करै है कर्मही ते तैं आवै है तेहिते जन्म ते
तौ शूद्रहै संस्कारते द्विजभये वेद अभ्यास कियो तब विप्रभये औ जब ब्रह्मकों
जानैगो तब ब्राह्मण कहावैगो ताते कर्महीते ब्राह्मणत्व तोमें आवै है अहं-
ब्रह्म तो धोखही है परब्रह्म जे श्रीरामचन्द्र हैं तिनहूं को तैं न जान्यो सो तैं
ब्राह्मणकैसे होइगो जबतैं साहबको जानैगो तबहीं ब्राह्मणहोइगो ॥ ३ ॥
जोतूतुरुकतुरुकिनीजाया। पेटैकाहेनसुनतिकराया ॥४॥
कारी पीरी दूहौ गाई। ताकर दूध देहु बिलगाई ॥५॥
औ जो तू कहैहै कि हम तुरुकिनी ते उत्पन्नहैं तौ पेटै काहे न सुनति
करायो तेहिते तुरुकिनी के पेटते भयेते मुसल्मान नहीं है ॥ ४ ॥ कारीपीरी
गाइको दूध मिलाइकै कोई बिलगावै तौ काबिलग होइहै ऐसे आत्मा तौ एक-
ही जातिहै हिन्दू तुरुक नहीं ह्वै सकै है ॥ ५ ॥
छांडुकपटनरअधिकसयानी।कहकबीरभजुशारँगपानी६॥
अपनी सयानी अधिककरिकैजोकपट करिराख्यो है सोछोड़ि दे विचारिकै
देखु तैंतो आत्मा न हिंदू है न तुरुकहै तैं जाको अंश है ऐसे शारँगपाणि जे
साहबहैं ताको भजु ताकी सेवा करु शारँगपाणी जो कह्यो ताको यह हेतुहै कि
धनुषबाण लिये तेरी रक्षा करिबेको तैयार हैं और तू और औरैमें लगाहै। जो