कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १४८ ) बीजक कबीरदास ।
साखी ॥ गुणातीतके गावते, आपुहि गये गमाय ॥
माटीतन माटीमिल्यो, पवनहि पवन समाय ॥ ५ ॥
गुणातीत जो साहबको लोक ताकेगावते कहे प्रकाशतेजहांसमष्टि जीवरहै है
तहां आपुही रामनाम को साहबमुख अर्थ गमाय कै संसारमुख अर्थ
करि संसारी द्वैगयो शरीर धारणकियो पुनि माटीमें माटी मिलिगयो औ
पंवनमें पवनं मिलिगयो अर्थात् ते पुनि जैसेके तैसे ह्र गये औ जो गुणा-
तीतके गावते यह पाठ होइ तौ यह अर्थ है गुणातीत जो है धोखा ब्रह्म
ताको गावत गावत साहब को गंवाइ जातभये ॥ ५ ॥
इति ईकसठवीं रमैनी समाप्त ।
अथ बासठवीं रमैनी ।
चौपाई ।
जोतोहिं कर्त्तावर्णविचारा । जन्मत तीनिदण्ड अनुसारा १
जन्मत शूद्रभये पुनि शूद्रा । कृत्रिमजनेउ घालिजगधुंद्रा२
जोतुमब्राह्मणब्राह्मणीजाये । और राह तुम काहेन आये ३
जो तू तुरुक तुरुकनी जाया । पेटैकाहेन सुनतिकराया ४
कारी पीरी दूहाँ गाई । ताकर दूध देहु बिलगाई ५
छाडुकपटनलअधिकसयानी। कहकबीर भजुशारँगपानी ६
जोतोहिंकर्त्तावर्णबिचारा । जन्मततीनिदंडअनुसारा ॥१॥
जेतोको ब्रह्मा वर्णको बिचारकियो कि ये ब्राह्मणहैं क्षत्रीहैं बैश्य हैं शूद्रहैं
मुसल्मानहैं सो एतो शरीर के धर्महैं तीनिदण्ड जे हैं संचित क्रियमान प्रारब्ध
तिनके कर्मके अनुसारते जन्मनकहे जन्मलेइ हैं ॥ १ ॥