कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
पृष्ठ 197, कुल 766 में से
संदर्भ में पढ़ेंरमैनी। (१४७)
गर्भ में रह्यो तब साहब ते कह्योहै कि तुम मोको गर्भते छुड़ायो मैं तिहारोभ-
जन करौंगो औ जब गर्भते निकस्यो जन्मलियो तब वहबात लवरी कै डार्यो मैं
कहा कह्यो है साहब को भजन न कियो कहा करन लग्यो ॥ १ ॥
लवरिविहानेलवरीसाँझा । यकलावरिविसहदयामाँझा ॥२॥
रामहुंकर मर्मनाहिं जाना । लै मतिठानी वेद पुराना ॥३॥
सो यहितरह ते लवरी बिहाने कहैहै औ साँझके लवरीकहैहै कहे आपन औ
गुरुके औ देवताके ऐक्यता मानै है काहेते तीनि कहैं हैं कि, एक लवरी जो है
मायासो हृदयमें बसैहै सोई सब लवरी कहावै है॥२॥ सो भला ब्रह्म को मर्म न
जानै तौ न जानै काहेते कि वहतो धोखा है सो कछू वस्तु होइ तौ जानै परन्तु
सांच औ सर्वत्र पूर्ण औ सबते श्रेष्ठ ऐसे जे श्रीरामचन्द्र हैं तिनको जो या मर्म
है कि, जो कोई मेरे सन्मुख होइ ताको मैं छुड़ाइ लेउँ या जीव न जानतभये
साहब छुड़ाइ लेइहै तामें प्रमाण ॥ “अबही लेउँ छुड़ाय कालते जो घट सुरति
सम्हारो”॥ याहीहेतु सुरति दियो है मतिलैकै कहेग्रहण करिकै वेदपुराणके अर्थ
ठानै है कहे अपने सिद्धांतमें लगायदेइ है ॥ ३ ॥
वेदहु केर कहानाहिं करई । जरतैरहै सुस्त नहिं परई ॥४॥
सिद्धांततौ एकैहोइहै साहबकोसिद्धांत जो तात्पर्यवृत्तिकरिकै यह कहैहै सो
भला न जानै मुक्ति न होइ परन्तु वेदमें जो सुकर्म लिखे हैं सो करिकै नरकतें
तौ बचै सो वेदहू की कही जो विधि निषेधहै सोऊ नहीं करैहै ऐसो मूढ़ यह
जीव शोकरूपी अग्निमें जरतै रहैहै सुस्त नहीं परै है सुचित्त नहीं होय है अर्थात्
इहां कुछ छोड़्यो उहां धोखाजोब्रह्महै तहांकुछ न समझ्यो औईश्वर जे हैं तिनहूं
को काहू न मान्यो औ सबके रखवार दयालु जे श्रीरामचन्द्रहैं तिनहूं छोड़्यो
तेहिते मूर्ख उंटके पाद है गयो न जमीनको न आसमान को वाको कौन
बचावै। जो कहो आत्माको चीन्हिकै बचिजाय तौ जो आत्मामें एती शक्तिहोती
तौ बंधनमें न परतो आपही बचिजातो ताते सबके रखवार जे साहबहैं तिनहींके
बचाये बचैहै ॥ ४ ॥