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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 196

( १४६ ) बीजक कबीरदास ।
पूर्व कहिआयेहैं कि एकै रामरखवारी करै हैं सो मैंहींहौं तिहारो पति तुम मोमें
लगौ जात्तेतुम्हारो उवार ह्वैजाइ तिनको तुमपति मानिराख्योहै ते तुम्हारे पति-
नहीं हैं वे बांधने वारे हैं ॥ ४ ॥
इति साठवीं रमैनी समाप्त ।
अथ इकसठवीं रमैनी ।
चौपाई ।
धर्मकथा जो कहतै रहई । लवरी नित उठि प्रातै कहई ॥ १॥
लवरिबिहानेलवरीसाँझा । यकलावरिसतहृदयामाँझा॥२॥
रामहुंकेरमर्मनहिं जाना । लै मति ठानी वेद पुराना ॥३॥
वेदहुकेर कहानहिंकरई । जरतै रहै सुस्त नहिं परई ॥ ४ ॥
साखी ॥ गुणातीतके गांवते, आपुहिं गये गमाय ॥
माटीतन माटीमिल्यो, पवनहि पवन समाय ॥ ५ ॥
धर्मकथाजो कहतैरहई । लवरीनितउठि प्रातैकहई ॥ १ ॥
धर्म की कथा जो कहतई रहैं कि स्त्री आपने पतिही को जानै और
दूसरेंको पतिकारि न जानै परन्तु धर्म कछूजानै नहीं हैं धर्म कहां है कि जीव यह
साहबकी शक्तिहै याके पति साहब हैं तामें प्रमाण॥ “अपरेयमितस्त्वन्यांप्रकृतिं-
विद्धिमेंपराम् । जीवभूतांमहाबाहो ययेदंधार्य्यतेजगत्”॥इतिगीतायाम्॥ “वासुदे-
वःप्रमाणैकःक्ष्मायमिदंजगत”॥दूसर कबीरजीका प्रमाण॥ “दुलहिनगावौमंगल-
चार । हमरेघरआयेरामभतार ॥ तनरतिकारि मैं मनरतिकरिहौं पांचौतत्वबराती ।
रामदेवमोहिंव्याहनऐहैं मैयौवनमदमाती ॥ सरिरसरोवरवेदीकरिहौं ब्रह्मावेदउचा-
रा । रामदेवसँगभांवरिलेहौं धनिधनिभागहमारा ॥ सुरतेंतीसौकौतुकआयेमुनिवर-
सहसअठाशी । कहैकबीरहमब्याहिचलेहैं पुरुषएकअबिनाशी” ॥ तेसाहबको या
जीव नहीं जानै हैं औरऔरमें लगे है बड़े प्रातःकाल उठिकै लवरी कहै है कि
हमहीं राम हैं दूसरो नहीं है अथवा जीव जन्म लेइहै सो प्रातःकाल है नव