कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंरमैनी । ( १४३ )
तोकोंसंसारबाधा न करिसकैगो । जगतरूपी राज्यके विषयानंद ब्रह्मानंद आदिक
जे सुखहैं ते सुखनहीं हैं जो कहा साहबके लोक जाइ फेरिकैसै आवैगो उहां
गये तो अपुनरावृत्ति कहिआये हैं तोकबीरजी बीरसिंह देवको साहबके लोक
लैगये लोक देखाइकै पुनि लैआइकै शिष्य करतभये औ श्रीकृष्णचन्द्र गोपनको
आपनो लोक देखाइ पुनि लैआये हैं उनको जगत् बाधानहीं करिसकैहै वे साहब
लोकही मैंहैं काहेते कि साहबको लोकप्रकाश सर्वत्र व्यापकहै साहबकी सकल
सामग्री साहबके रूपई वर्णन करि आये हैं साहब लोकप्रकाश सर्वत्रपूर्ण है
तौसाहबको लोक औ साहब सर्वत्रपूर्णई है । जे साहबको जानै हैं औ जगत्ऊमें
हैं तौसाहब के लोकई में बने हैं उनको संसार बाधा नहीं करिसकै ॥ ३ ॥
एकोवार न जैहैवांको । बहुरि जन्म नहिं होइहै ताको॥४॥
जायपायदेहौसुखधाना । निश्चयवचनकबीरकोमाना ॥५॥