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कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 19

( १६ ) बीजककी-अनुक्रमणिका ।

[बायाँ स्तम्भ]
विषय. पृष्ठ.
फुटकर शब्द ।
( टीकान्तर्गत )
बलि हारी अपने साहब की १९
ज्यों भृंगी गये कीट के पासा ८१
आसन पवन किये दृढ रहुरे १०३
मन रे जब ते राम कह्योरे.... ११०
चारो युग में कबीर साहबका-
प्राकट्य ... ... ११२
दुलहिन गावो मंगल चार ... १४६
दश मुकामी रेखता ... २३८
राम न जप्यो कहाँ भौ मन्दा ३२९
चलो सखी बैकुण्ठ विष्णु
माया जहाँ .... ... ३५७
जहँ सतगुरु खेलैं ऋतु बसंत ३७७
जागुरे जिव जागुरे .... ... ४५०
हम न मरैं मरि है संसारा ... ४५५
जो तै रसना राम न कहि है ४६०
राम कहत चलु राम कहत
चलु ( गो०स्वा० ) ... ४६३
क्या नागे क्या बाँधे चाम ... ४७२
सदा बसंत होत जेहि ठाऊं ४८२
चेति न देखैरे जग धंधा .... ५००
पंचदेह निर्णय ।
एक जीव जो स्वतः पद ... ५२७
संतो षट प्रकार की देही ... ५२७
संतो सूक्ष्म देह प्रमाना .... ५२८

[दायाँ स्तम्भ]
विषय. पृष्ठ.
संतो कारण देह सरेखा ... ५२८
संतो महा कारण तन जाना ५२८
संतो केवल देह बखाना ... ५२९
संतो सुना हंस तन ब्याना... ५२९
अब तो अनुभव अग्निहि लागी ५५५
संतो राम नाम जो पावे ... ५६७
जहां पुरुष सतभाव तहँ हंसनको
बासा ... .... ... ५७६
रामको नाम चौमुक्तिका मूल है ५९१
संतो या मन है बड जालिम... ५९२
कालके माथे पगधरी ... ६०४
गगनमंडल दृग महलमें ... ६०४
यहि औतार चेतो नहीं ... ६०४
कंचन केवल हरि भजन .... ६०७
जो रक्षक है जीवको .... ६०७
जहाँ कालकी गम नहीं ... ६०८
चौका विधानका शब्द ।
अगर चन्दन घसि चौकपुरावा ६०८
दशौदिशाकर मेटौ धोखा ... ६०९
अबधू ऐसा योग विचारा ... ६१२
बिन परसन दरशन बिनु .... ६१६
बहुतक लोग चढ़े बिन भेदा... ६४२
कलिमां बाँग निमाज गुजारें... ६४४
रूप अखण्डित ब्यापी चैतन्य ६४५
सुनुधर्मदास भक्तिपद ऊंचा... ६४७
संतो बीजक मत प्रमाना ... ६५७

इति अनुक्रमणिका ।