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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 183

रमैनी । ( १३३ )
प्रमाण ॥ ( रामकेनामतेपिंडब्रह्मांडसब रामकोनाममुनिभर्ममानी । निर्गुण-
निरंकार के पार परब्रह्म है तासुको नामरङ्गारजानी । विष्णुपूजाकरै ध्यान-
शङ्करधरै भनहि सुविरंचि बहुबिबिध बानी । कहैकबीर कोइ पारपावैनहीं
राम को नामहै अकह कहानी ) ॥ ५ ॥
इति इक्यावनवीं रमैनी समाप्त ।
अथ बावनवीं रमैनी ।
चौपाई ।
ज्यहिकारणशिवअजहुंवियोगी।अङ्गविभूतिलायभेयोगी १
शेषसहसमुखपार न पावैं । सोअबखसमसहितसमुझावै२॥
ऐसीविधिजोमोकहँध्यावै । छठयें मास दर्श सो पावै॥ ३ ॥
कौनेहुं भांति दिखाई देऊ। गुप्तै रहि सुभाव सब लेऊ॥४॥
साखी ॥ कहहिं कबीर पुकारिकै, सबका उहै हवाल ॥
कहाहमार मानै नहीं, किमिछूटै भ्रमजाल॥ ५ ॥
ज्यहिकारणशिवअजहुंवियोगी।अंगविभूतिलायभेयोगी १॥
शेषसहसमुखपारनपावै।सोअबखसमसहितसमुझावै॥ २ ॥
जाकेकारण शिवअंगमें बिभूतिलगाइकै योगीभयेपरन्तुअजहूँलौं बासों बियो-
गी हैं काहेते कि जोबियोगी न हो ते तो तमोगुणाभिमानी काहे रहते॥ १॥औ
शेष सहस मुखते कहिकै पार न पायो तेई दुर्लभ खसम जे परमपुरुष श्रीराम-
चन्द्रहैं ते हिते सहित जीवनको समुझावैहैं काहेते जीवनको हित मानिकै समु-
झावै है कि मोको जानिकै मेरे पासआवै संसार दुःख न पावै ॥ २ ॥
ऐसीविधिजो मोकहँध्यावै । छठयें मास दर्शसोपावै ॥ ३ ॥
कौनेहुंभांति दिखाईदेऊ । गुप्तैरहि सुभाव सबलेऊ ॥ ४ ॥