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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 181

रमैनी। ( १३१ )
नैसी उसकी शकलैहै लेकिन बयान नहीं कर सक्ताहै। औ कुरान खोदाको कलाम
कहैवात है जो बदन न होता तौ कलाम कैसे कहते। सो निराकार साकार के परे अकह
जो साहब है ताकी रमैनी कहे तिसके रूपादि बर्णनकी कथा जबानमें किस तरहसे
कहौ, बचनमें तौ आवै नहीं है । अथवा जाकर नामैंअकहुवाहै ताकोरूप अकहुवा-
बनैहै तिसकी कथाकहांहै । जोवाहूअकहुवा होयगी जो ऐसाभया तौ जानि न
परैगो किसूको मिथ्या होयजाइगो । तौनैको कबीरजी कहै हैं कि सबको हमको
अकहुवा है कछू उसको साहबको कोई बात अकहुवा नहीं है हमताहीकी कही
रमैनीगाइतहै सोजोकछुरमैनीमेंलिख्योहै सो सांचीहै ॥ १ ॥
कहै को तात्पर्यहै ऐसा । जस पंथीवोहित चढ़िवैसा ॥ २ ॥
हैकछुरहनिगहनिकी बाता । बैठारहाचलापुनिजाता ॥ ३ ॥
जौनकहि आये तौनेको तात्पर्य ऐसाहै कि पांचशरीरते साहब नहीं मिलैहै
काहेते मनबचनके परैहैसाहब है औ जोहमसों साहब कहा कि जीवनको रमैनी
उपदेश करौ ताको हेतुयह है साहब बिचारयो कि मनवचकेपरे जो मैंहौं सों
बिनामेरे बताये जीव मोको न जानेंगे जोकहै। साहबको कापरी है न जानेंगे
नहींतौ साहबके दयालुताकी हानिहोइहै याते उपदेशकरै कहै हैं सो जौने अकह
रामनाम के जपेते साहब प्रसन्नहै हंसरूपदेइहै तौने रामनाम रमैनी ते जानिहै
काहेते कि ॥ (इच्छाकरभवसागर वोहितरामअधार । कहहिं कविरहरि शरणगहु
गोबच्छखुर बिस्तार) ॥ ऐसी साखीरमैनी में लिखी है तेहिते या अर्थ आया कि
संसारसागर पारहोवैको एक रामनामही जहाजमानि नामार्थ में जोशरणकीबि-
धिहै ताको अनुसंधानकरत रामनामजपै ॥२॥ यहरहनि गहनिकैकै जैसे वछवा
को खुरलोग उतरिजायहै ऐसो संसारसागरमें रामनामको अभ्यासकै तरिजाय हैं
कैसे जैसे नावकोचढ़ैया नावमेंबैठाहै पै पारहोत जायहै ऐसे रामनामको जपैया
संसारसागरमें बैठा देखो परैहै परन्तु पारको चलो जायहै ॥ ३ ॥
रहैवदननहिंस्वागसुभाऊ । मनंस्थिरनहिंबोलैकाऊ ॥ ४ ॥
इसतरहके जेहैं जिनकेबदनकहे संभाषण करिबे ते जीवनको स्वागकोसुभाऊ
कहे ब्रह्मह्वैजावो चतुर्भुजादिकनके लोकमें जाइचतुर्भुज हैजावौ और नानादेवतन्