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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 180

( १३० ) बीजक कबीरदास ।
अथ इक्यावनवीं रमैनी ।
चौपाई
जाकरनाम अकहुवाभाई । ताकर कही रमैनी गाई ॥ १ ॥
कहैको तात्पर्य है ऐसा । जस पन्थी वोहित चढ़िवैसा ॥ २ ॥
हैकछुरहनिगहनिकीबाता । बैठारहत चला पुनिजाता ॥ ३ ॥
रहैबदननहिंस्वागसुभाऊ। मनस्थिर नहिं बोलैकाऊ ॥ ४ ॥
साखी ॥ तनरहते मन जातहै, मनरहते तनजाय ॥
तनमन एकै ह्वैरह्यो, हंस कबीर कहाय ॥ ५ ॥
जाकरनाम अकहुवाभाई । ताकर कहीरमैनी गाई ॥ १ ॥
जाको नाम अकह है ताको तौ हिन्दू मन बचनकेपरे कहते हैं औ मुसल-
मान बेचिगून बेनिमून कहतेहैं । सो हम पूछते हैं "हिन्दूकहै कि,
वह तो निराकार होतो तौकहैंहैं कि, वेद मेरी श्वासहै शरीर न होतो तौ वेद-
श्वास कैसेहोतौ । जोकहोवेद तो मायकहें 'साकार है तौ' मिथ्याके बताये तुम्हीं
सांच पदार्थ कैसे जानिहौ । जो कहे साकार तौ मध्यम परमान ठहरा य तौ
अनित्य होइहै अकहुवा न होइगो । अरु जो मुसलमान निराकार कहैहैं कि उसके
आकार नहीं है तो मूसा पैगंबरको कोहनूरकें पहाड़ में हुँगुनी दिखायो सो वह
पहाड़ छार द्वैगयो जो शरीर न होतोतौ छुगुनी कैसे देखावतो । कुरानमें लिखैहै
कि जिंसतरफ़ अपनामुंह फेरै तिसी तरफ़ साहबका मुँहहै, औ सबके हाथके
ऊपर अल्लाहको हाथहै, औ अल्लाह महम्मदसों कहतेहैं कि, "जिसका हाथप-
करातूने तिसका हाथपकरा मैंतब सों इनडौलौंतै यहआवताहै" कि, उसके शक-
लहै । पै जिस तरहकीशकल सोकोईनहीं कहिसकैहै काहेते कि जो उसके मिसाल
दूसरा कोई होय तौ उसकी उपमादैके समुझाय सक्के सो उसकी शकल तो
कोईनहीं समुझाय सक्ता है । लेकिन जो कोई उसकी शकल देखा है सोई जानताहै ।