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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 178

( १२८ ) बीजक कबीरदास ।
अथ उनचासवीं रमैनी ।
चौपाई ।
दरकीवात कहौ दुर्वेशा । वादशाह है कौने भेशा ॥ १ ॥
कहां कूच कहँकरै मुकामा।कौनसुरतिकोकरौंसलामा ॥२॥
मैंतोहिं पूंछौं मुसलमाना । लाल जर्दकी नाना बाना ॥३॥
काजीकाज करौ तुमकैसा। घर २ जबै करावो वैसा ॥ ४ ॥
बकरीमुर्गीकिनफुरमाया।किसकेहुकुमततुमछुरीचलाया५॥
दर्द न जानै पीर कहावै । वैता पढ़ि २ जग समुझावै ॥६॥
कहकवीरयकसय्यदकहावै।आपुसरीका जगकबुलवै ॥७॥
साखी ॥ दिन भर रोजा धरतहौ, राति हततहौ गाय ॥
यहतौखून वहबंदगी, क्योंकर खुशीखोदाय ॥८॥
और पदको स्पष्टही है ॥ १ ॥ २ ॥ ३ ॥ ४ ॥ ५ ॥ दर्दतो तिहोरें
दिलमें आती नहीं है गला कटावतमें अल्लाहको बागीचा खराब करतेहौ अरु
बैतें पढ़ि २ के पीरकहावतेहौ औजगत् को समुझावतेहौ अर्थात् हौ बेपीर पीर-
भर कहवावतेहो॥६॥सोकबीरजी कहैं कि एक सय्यदजोहै वह पीर गुरुवा सों
जैसा आप खुआरहै औ तैसे सबको खुआरकरै है ॥७॥ दिनको तो रोजा धरते
हौ औ बंदगी करतेहौ औ रातिको गाईहततेहौ कहे मारतेहौ सो यह तौं
खूनकरतेहौ बहुतभारी औ वहबन्दगी बहुतथोरी करतेहौ दिनको न खायो राति-
हीको खायो क्योंकर तिहारेऊपर खोदाय खुशी होय ताते यह कि वह तौ
साहबको है सो जिनको गला तुम काटतेहौ तिनहीं के हाथ तुम्हारऊ गला
वह साहब कटावेंगे ॥ ८ ॥
इति उनचासवीं रमैनी समाप्त ।