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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

पृष्ठ 174, कुल 766 में से

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पृष्ठ 174

( १२४ ) बीजक कबीरदास ।
पियतभयो औजो जगद्मुख अर्थमें लग्यो सोपानिहीपानी पियतभयो साहब मुख
अर्थ न जान्यो एते सबमरिगये ॥ ३॥ अपने अपने पन्थ चलावतभये जब पवन
थकितभयो कहे श्वासारहितभई तब दशौदिशा कहे दशौ इन्द्रिनद्वारके जे
देवता ते जातरहे तब दश द्वारको जो शरीरगाउँ सो उजारि ह्वैगयो कहै-मरिगये
याते या आयो कि जे नानामत चलावै हैं मतयहै रहिजायहै जा शरीरमें मरिकै
गये ताहीकी सुधि रहैहै ॥ ४ ॥
मीनजालभोई संसारा । लोहकिनावपषानकोभारा ॥ ५॥
याही रीतिते मरत जियत जे मीनरूप जीवहैं तिनको यहि संसारसमुँद्र में
बाणी जालफंदनको भयो सो जे जालमें फँदे ते तो अविद्याके जालमें फँदेही हैं
जे उबरे चाहैं हैं तेजड़वत् जोमन पाषाण तांहीको है भार जामें ऐसी जोअविद्या-
रूपी लोहेकी नाव तामें चढ़े सोवह बूड़िही जायगी फिरवही संसारमें
परे रहैहैं ॥ ५ ॥
खेवै सबै मर्म नहिं जाना । तहिबो कहै रहै उतराना ॥६॥
सब गुरुवाजन खेवै हैं कहे वही धोखाब्रह्ममें लगावै हैं औ या कहैहैं कि
हम मर्मजान्योहै तुम यामें लगौ पारह्वैजाउगे सोवह जो संसारसमुद्र में अविद्या-
रूपी नाव मन पाषाण ते भरी बूड़िही जायगी तामें गुरुचेला दोउ बूड़िही
जायँगे पार न पावैंगे अर्थात् वेदान्त आदि नाना शास्त्रनमें नाना तर्क उठाय
उठाय बिचार करतऊ जायहैं संकल्प बिकल्प नहींछूटै तात्पर्य तो जानै नहीं औ
जन्मभरि चेलापूंछतई जाय है परंतु तबहूं यही कहै हैं कि तुम संसार समुद्रमें
उतराने हौ कहे उबरेहौ यह नहीं विचारैहैं कि संकल्प बिकल्प छूटबइ नहीं
कियो संसारते कैसेउबरेंगे ॥ ६ ॥
साखी ॥ मछरीमुखजसकेचुवा, मुसवनमुंहगिरदान ॥
सर्पन माहँ गेहेजुवा, जाति सवनकी जान ॥ ७ ॥
जैसे मछरीके मुखमें केंचुआ मुसवानके मुहँमें गिर्दान अर्थात् जब मूस
गिर्दानको रंगदेख्यो तबलालमास अथवा लाल फल जानि धरनधायो जब फूंक