कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
पृष्ठ 173, कुल 766 में से
संदर्भ में पढ़ेंरमैनी । ( १२३ )
अथ पैंतालीसवीं रमैनी ।
चौपाई
हिरणाकुश रावण गये कंसा। कृष्णगयेसुरनर मुनिवंसा॥ १॥
ब्रह्मा गये मर्म नहिं जाना । बड़ सबगयो जो रहेसयाना ॥२॥
समुझिनपरीरामकीकहानी।निरवकदूधकिसरवकपानी ३॥
रहिगोपंथ थकितभो पवना।दर्शौदिशाउजारिभोगवना॥४॥
मीनजाल भो ई संसारा।लोह कि नाव पषाणको भारा॥५॥
खेवै सबै मरम नहिंजाना । तहिवो कहै रहै उतराना॥ ६ ॥
साखी ॥ मछरी मुखजस केचुवा, मुसवन मुहँ गिरदान ॥
सर्पनमाहँ गहेजुवा, जाति सवनकी जान ॥ ७ ॥
हिरणाकुशरावणगयेकंसा । कृष्णगयेसुरनरमुनिवंसा॥ १ ॥
ब्रह्मागयेमरमनहिं जाना । बड़सबगये जो रहेसयाना ॥ २ ॥
श्रीकबीरजी कहै हैं कि हिरणाकुश रावण कंस मरिजात भये औ इनती-
नोंके मरवैया कालस्वरूप जे कृष्ण तेऊ मरजातभये दशौ अवतार निरंजन
नारायणै ते होइ हैं या हेतुते मरिजानवारे तीनिकह्यो मारनवारो एकहीकह्यो
औ सुर नर मुनि इनके बंशवारे तेऊ मरिगये औ ब्रह्मा आदिक जे बड़ेबड़े
सयानरहें वेऊ वेदको तात्पर्य न जान्यो मरिगये ॥ १ ॥ २ ॥
समुझिनपरीरामकीकहानी।निरवकदूधकिसरवकपानी ३॥
रहिगोपंथथकितभोपवना । दशौदिशाउजारिभोगवना॥४॥
रामकी कहानी कहे रामनामकी कहानि जो चारो बेदकहैंहैं सो काहूको न
समुझिपरी धौं निरबक दूधहीहै धौं पानिहीपानी है अर्थात् जिनको परमपुरुष
श्रीरामचन्द्र को ज्ञानभयो वेदको तात्पर्यबूझ्यो साहबमुख अर्थलगायो सोदूधही